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मंगलवार, 5 जुलाई 2016

गुर्जरों की देशभक्ति/گوجروں کی حب الوطنی /Gujjars patriotism

‎‎वीर गुर्जर संस्कृति /VeerGurjar Culture/ بہادر گوجر ثقافت 
रणभूमी में गुर्जरों की देशभक्ति/گوجروں کی حب الوطنی /Gujjars patriotism
गुज्जर कम्युनिटी के लोगों ने आतंकियों के खिलाफ जम्मू पीस मिशन बनाया।
گوجر کمیونٹی کے لوگوں نے دہشت گردوں کے خلاف جموں پیس مشن بنایا.
جموں و کشمیر کے ایک گاؤں میں 700 دہشت گردوں کو گوجروں نے مار کر کتوں کو کھلا دیا.
From The Page Of-Indian Army : The Best - भारतीय सेना : हमारी शान
Aerospace/Defense
जम्मू-कश्मीर के एक गांव में 700 आतंकवादियों को गुर्जरों ने मार कर कुत्तों को खिला दिया।।।
आतंकी हमेशा आमलोगों के मन में डर पैदा कर देते है और वे उनका सामना करने से डरते हैं लेकिन जम्मू कश्मीर के हिल काका इलाके के लोगों ने कुछ अलग ही किया है। उन्होंने डरने के बजाय आतंकियों का सामना किया और उन्हें मार गिराया। लाइव इंडिया हिंदी की एक रिपोर्ट के अनुसार यहाँ के गाँव वालों ने आतंकियों के साथ एक महीने से ज्यादा समय तक अपनी लड़ाई लड़ी और उन्हें मार गिराया। यह गांव पहाड़ की चोटी पर है इसलिए इसमें आंतकी आसानी से घुसपैठ कर लेते थे। यहां तक कि यह गांव खूंखार आतंकी उमर मूसा का अड्डा बन गया था। यहाँ के लोगों में उनके लिए इतना गुस्सा था कि मूसा को मारने के बाद उन्होंने उसकी लाश को दफनाने की जगह कुत्तों के हावले कर दिया था।
यहाँ के लोगों ने बताया कि , 2003 में हिलकाका में आतंकियों की तूती बोलती थी। आतंकी गांव के लोगों को जिहादी बनाने के लिए जबरदस्ती करते थे, लालच देते थे। इस आंतक से निपटने के लिए गुज्जर समुदाय के लोगों ने आतंकियों के खिलाफ जम्मू पीस मिशन बनाया। गुज्जरों की इस पहल की वजह से आतंकियों ने गुज्जर हाजी मोहम्मद आरिफ को मौत के घाट उतार दिया था। लेकिन आतंक के खिलाफ एकजुट हुए लोगों ने हार नहीं मानी। हाजी मोहम्मद की मौत के बाद उनकी जंग को उनके छोटे भाई ताहिर हुसैन ने भी जारी रखा। ताहिर ने बताया कि उस वक्त आतंकियों ने जिहादी बनने के लिए 52 लाख रुपए देने को लालच भी दिया। लेकिन हमने नहीं लिया, क्योंकि हम हिंदुस्तानी हैं।
उन्होंने बताया कि 26 जनवरी 2003 को आतंकियों के खिलाफ गांव वालों ने सेना के साथ मिलकर ऑपरेशन सर्प विनाश शुरू किया। इस ऑपरेशन की शुरुआत के बाद पता चला कि हिल काका पर 700 से ज्यादा आतंकी मौजूद हैं। इसके बाद सेना ने गांव खाली कराया। लोग एक महीने से ज्यादा जंगल में रहे। सेना हमारे लिए खाने का सामान हेलिकॉप्टर से पहुंचाती थी। यहां के गुज्जरों ने 2003 में ही 17 अप्रैल को आतंकियों पर हमला कर दिया। 27 मई तक उनसे लड़ते रहे और उन्हें यहां से उखाड़कर ही दम लिया।
- लोगों ने बताया कि हिलकाका में 2003 तक आतंकियों की तूती बाेलती थी। उन दिनों को याद कर आज भी हम सिहर जाते हैं।
- आतंकी यहां के लाेगों को जिहादी बनाने के लिए लालच देते तो कभी जबरदस्ती करते।
- यहां के गुज्जर कम्युनिटी के लोगों ने आतंकियों के खिलाफ जम्मू पीस मिशन बनाया।
- इसी के चलते आतंकियों ने गुज्जर हाजी माेहम्मद आरिफ को मौत के घाट उतार दिया। लेकिन लोगों ने हार नहीं मानी।
- हाजी माेहम्मद की जंग को उनके छोटे भाई ताहिर हुसैन ने भी जारी रखा।
- ताहिर ने बताया कि तब आतंकियों ने 52 लाख रुपए देने को लालच भी दिया। लेकिन हमने नहीं लिया, क्योंकि हम हिंदुस्तानी हैं।
700 आतंकी का था अड्डा...
- ताहिर ने बताया कि 26 जनवरी 2003 को आतंकियों के खिलाफ गांव वालों ने सेना के साथ मिलकर ऑपरेशन सर्प विनाश शुरू किया।
- तब पता चला कि हिल काका पर 700 से ज्यादा आतंकी मौजूद हैं। सेना ने गांव खाली कराया।
- एक माह से ज्यादा हम लोग जंगल में रहे। सेना हेलिकाॅप्टर से खाना पहुंचाती थी।
- यहां के गुज्जरों ने 2003 में ही 17 अप्रैल को आतंकियों पर हमला कर दिया।
- 27 मई तक उनसे लड़ते रहे और उन्हें यहां से उखाड़कर ही दम लिया।
'सर्प विनाश' से सुर्खियों में आया हिल काका
कुलाली के सरपंच गुर्जर अब्दुल मजीद के मुताबिक हिल काका रंजाटी हिल रेंज में आता है। 2003 में सेना ने ऑनरेशन सर्प विनाश चलाया जिसमें 60 से अधिक विदेशी और अफगानी आतंकवादियों को मार गिराया। सेना ने यहां तक पहुंचने के लिए कच्ची सड़क और हेलीपैड बनाया। प्राकृतिक गुफाओं में छिपे आतंकियों को मारने के लिए सेना को हेलिकॉप्टरों की मदद लेनी पड़ी थी। बड़ी तादाद में सेना एवं स्थानीय गुर्जर युवक भी अभियान में शहीद हुए। कुलाली में आवाम और जवान मेमोरियल बना है। 1999 मई और जुलाई 2002 में विदेशी आतंकवादियों ने गुर्जर परिवारों का सामूहिक कत्ल किया था। यह परिवार पहाड़ों पर भेड़-बकरियां चराने गए हुए थे। हिल काका में सेना ने कुछ आतंकियों को जिंदा भी पकड़ा था। आज यह इलाका स्थानीय गुर्जर के सहयोग की वजह से आतंकवाद मुक्त है।
इसी गांव के जावेद अहमद कहते हैं कि वह अपने भविष्य को लेकर बहुत चिंतित हैं। वह कहते हैं कि यहां छोटी-छोटी जरूरतें भी बड़ी मुसीबत बन जाती हैं। वह दसवीं तक पढ़े हैं। कुछ ऐसा ही हाल 12वीं के एग्जान दे रहे स्टूडेंट लियाकत की भी है। अचानक से यह गांव चर्चा में इसलिए आया है क्योंकि आतंकियों के ठिकानों को बर्बाद कर देने वाले हिल काका के गांव वाले सड़क और बेसिक फैसिलिटीज की मांग कर रहे हैं।
दिल्ली तक कई बार गुहार लगाने वाले इन लोगों को अपने बच्चों के भविष्य के लिए अब परिवहन मंत्री नितीन गडकरी से उम्मीद है। वे चाहते हैं कि उनके बच्चे भी खूब पढ़ें और देश की रक्षा के लिए सेना के साथ कदम से कदम मिलाएं। लेकिन इसके लिए पहले सड़क बन जाए।
Urdu Version-
جموں و کشمیر کے ایک گاؤں میں 700 دہشت گردوں کو گوجروں نے مار کر کتوں کو کھلا دیا ...
دہشت گرد ہمیشہ عام لوگوں کے ذہن میں خوف پیدا کر دیتے ہیں اور وہ ان کا سامنا کرنے سے ڈرتے ہیں لیکن جموں کشمیر کے ہل کاکا علاقے کے لوگوں نے کچھ مختلف ہی کیا ہے. انہوں نے ڈرنے کے بجائے دہشت گردوں کا سامنا کیا اور انہیں مار گرایا. لائیو انڈیا ہندی کی ایک رپورٹ کے مطابق یہاں کے گاؤں والوں نے دہشت گردوں کے ساتھ ایک ماہ سے زیادہ وقت تک اپنی جنگ لڑی اور انہیں مار گرایا. اس گاؤں پہاڑ کی چوٹی پر ہے اس لئے اس میں دہشت گرد آسانی سے دراندازی کر لیتے تھے. یہاں تک کہ یہ گاؤں خونخوار دہشت گرد عمر موسی کا اڈہ بن گیا تھا. یہاں کے لوگوں میں ان کے لئے اتنا غصہ تھا کہ موسی کو قتل کرنے کے بعد انہوں نے اس کی لاش کو دفن کی جگہ کتوں کے هاولے کر دیا تھا.
یہاں کے لوگوں نے بتایا کہ، 2003 میں هلكاكا میں دہشت گردوں کی طوطی بولتی تھی. دہشت گرد گاؤں کے لوگوں کو جہادی بنانے کے لئے زبردستی کرتے تھے، لالچ دیتے تھے. اس دہشت سے نمٹنے کے لئے گوجر برادری کے لوگوں نے دہشت گردوں کے خلاف جموں پیس مشن بنایا. گججرو کی اس پہل کی وجہ سے دہشت گردوں نے گوجر حاجی محمد عارف کو موت کے گھاٹ اتار دیا تھا. لیکن دہشت گردی کے خلاف متحد ہوئے لوگوں نے ہار نہیں مانی. حاجی محمد کی موت کے بعد ان کی جنگ کو ان کے چھوٹے بھائی طاہر حسین نے بھی جاری رکھا. طاہر نے بتایا کہ اس وقت دہشت گردوں نے جہادی بننے کے لئے 52 لاکھ روپے دینے کو لالچ بھی دیا. لیکن ہم نے نہیں لیا، کیونکہ ہم ہندوستانی ہیں.
انہوں نے بتایا کہ 26 جنوری 2003 کو دہشت گردوں کے خلاف گاؤں والوں نے فوج کے ساتھ مل کر آپریشن سانپ تباہی شروع کیا. اس آپریشن کے آغاز کے بعد پتہ چلا کہ ہل کاکا پر 700 سے زیادہ دہشت گرد موجود ہیں. اس کے بعد فوج نے گاؤں خالی کرایا. لوگ ایک ماہ سے زیادہ جنگل میں رہے. فوج ہمارے لئے کھانے کا سامان ہیلی کاپٹر سے پہنچاتی تھی. یہاں کے گججرو نے 2003 میں ہی 17 اپریل کو دہشت گردوں پر حملہ کر دیا. 27 مئی تک ان سے لڑتے رہے اور انہیں یہاں سے اکھاڑ کر ہی دم لیا.
- لوگوں نے بتایا کہ هلكاكا میں 2003 تک دہشت گردوں کی طوطی باےلتي تھی. ان دنوں کو یاد کر آج بھی ہم سہر جاتے ہیں.
- دہشت گرد یہاں کے لاےگو کو جہادی بنانے کے لئے لالچ دیتے تو کبھی زبردستی کرتے.
- یہاں کے گوجر کمیونٹی کے لوگوں نے دہشت گردوں کے خلاف جموں پیس مشن بنایا.
- اسی کے چلتے دہشت گردوں نے گوجر حاجی ماےهممد عارف کو موت کے گھاٹ اتار دیا. لیکن لوگوں نے ہار نہیں مانی.
- حاجی ماےهممد کی جنگ کو ان کے چھوٹے بھائی طاہر حسین نے بھی جاری رکھا.
- طاہر نے بتایا کہ اس وقت دہشت گردوں نے 52 لاکھ روپے دینے کو لالچ بھی دیا. لیکن ہم نے نہیں لیا، کیونکہ ہم ہندوستانی ہیں.
700 دہشت گرد کا تھا اڈے ...
- طاہر نے بتایا کہ 26 جنوری 2003 کو دہشت گردوں کے خلاف گاؤں والوں نے فوج کے ساتھ مل کر آپریشن سانپ تباہی شروع کیا.
- پھر پتہ چلا کہ ہل کاکا پر 700 سے زیادہ دہشت گرد موجود ہیں. فوج نے گاؤں خالی کرایا.
- ایک ماہ سے زیادہ ہم لوگ جنگل میں رہے. فوج هےلكاپٹر سے کھانا پہنچاتی تھی.
- یہاں کے گججرو نے 2003 میں ہی 17 اپریل کو دہشت گردوں پر حملہ کر دیا.
- 27 مئی تک ان سے لڑتے رہے اور انہیں یہاں سے اکھاڑ کر ہی دم لیا.
'سانپ تباہی' سے شہ سرخیوں میں آیا ہل کاکا
كلالي کے سرپنچ گوجر عبد مجید کے مطابق ہل کاکا رجاٹي ہل رینج میں آتا ہے. 2003 میں فوج نے نرےشن سانپ تباہی چلایا جس میں 60 سے زائد غیر ملکی اور افغان دہشت گردوں کو مار گرایا. فوج نے یہاں تک پہنچنے کے لئے کچی سڑک اور هےليپےڈ بنایا. قدرتی غاروں میں چھپے دہشت گردوں کو مارنے کے لئے فوج کو ہیلکاپٹروں کی مدد لینی پڑی تھی. بڑی تعداد میں فوج اور مقامی گوجر نوجوان بھی مہم میں شہید ہوئے. كلالي میں عوام اور نوجوان میموریل بنا ہے. 1999 مئی اور جولائی 2002 میں غیر ملکی دہشت گردوں نے گوجر خاندانوں کا اجتماعی قتل کیا تھا. یہ خاندان پہاڑوں پر بھیڑ بکریاں چرانے گئے ہوئے تھے. ہل کاکا میں فوج نے کچھ دہشت گردوں کو زندہ بھی پکڑا تھا. آج یہ علاقہ مقامی گوجر کے تعاون کی وجہ سے دہشت گردی مفت ہے.
اسی گاؤں کے جاوید احمد کہتے ہیں کہ وہ اپنے مستقبل کو لے کر بہت فکر مند ہیں. وہ کہتے ہیں کہ یہاں چھوٹی چھوٹی ضروریات بھی بڑی مصیبت بن جاتی ہیں. وہ دسویں تک پڑھے ہیں. کچھ ایسا ہی حال 12 ویں کے اےگجان دے رہے اسٹوڈنٹ لیاقت کی بھی ہے. اچانک سے یہ گاؤں بحث میں اس لئے آیا ہے کیونکہ دہشت گردوں کے ٹھکانوں کو برباد کر دینے والے ہل کاکا کے گاؤں والے سڑک اور بنیادی پھےسلٹيج کا مطالبہ کر رہے ہیں.
دہلی تک کئی بار فریاد لگانے والے ان لوگوں کو اپنے بچوں کے مستقبل کے لئے اب وزیر ٹرانسپورٹ نتين گڈکری سے امید ہے. وہ چاہتے ہیں کہ ان کے بچے بھی خوب پڑھیں اور ملک کی حفاظت کے لئے فوج کے ساتھ قدم سے قدم ملائیں. لیکن اس کے لئے پہلے سڑک بن جائے.

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