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रविवार, 15 जनवरी 2017

राष्ट्रिय पथिक

विजय सिंह पथिक (भूप सिंह गुर्जर)
विजय सिंह पथिक न केवल गुर्जर जाति के अपितु सम्पूर्ण भारत के गौरव थे।
उन्होंने पटेल जी की भांति किसानों के हक में बिजौलिया क्षेत्र में “बिजौलिया आन्दोलन” चलाया था जो सफल रहा था।
अंग्रेज इस आन्दोलन की सफलता से भयभीत और
चौकन्ना हो गये थे।
उन्हें पकड़ने तथा दंडित करने का प्रयास करते रहे।
उनका जन्म भी महान देशभक्त और 1857 के क्रांतिकारी
श्री हमीर सिंह राठी गुर्जर के धर जिला बुलंदशहर(उत्तर प्रदेश)में हुआ।
उनकी कर्मस्थली राजस्थान रहा।
वे सच्चे अर्थ में क्रांतिकारी थे,उनके अंदर देश को स्वतंत्र
कराने की उत्कृष्ट इच्छा थी।
भारतीय संसद में बम फैलने वाले तथा उस बम
को बनाने वाले पथिक ही थे।
गिरफ्तारी देने वाले सरदार भगत सिंह आदि थे जो सब पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार किया था।
संसद की इस धटना के बाद उन्होने अपना नाम विजय सिंह पथिक धोषित करके राजस्थान चले गये थे।
इस प्रकार अंग्रेज पुलिस को चकमा देकर बच गये थे।
अधिकतर क्रांतिकारी मारे जा चुके थे या जेलों में थे।
इस कारण पथिक जी ने फिर बिजौलिया आंदोलन शुरु किया
और गांधी जी के सहयोगी बन गये।
स्वतंत्रता आंदोलन में नया मोड़ उस समय आया था जब 8 अगस्त 1942 ई. में कांग्रेस के बम्बई अधिवेशन में यह प्रस्ताव पारित किया गया था कि करो या मरो तथा अग्रेज़ों भारत छोड़ो।
सभी बड़े नेताओं को जेलों में डाल दिया गया था,तब विजय सिंह पथिक जैसे दूसरी पंक्ति के नेताओं ने आंदोलन की बागडोर संभाली थी।
‘पथिक’ आंदोलन को गति प्रदान करने के लिये रात-दिन
जी जान से जुट गये।
वे चिंगारी बन गये उस आंदोलन की तभी तो उन्हें “1942 की चिंगारी” के नाम से भी जाना जाता है।
गांधी,मोहनलाल,सुखाड़िया,महादेव रानाड़े,नेहरू तथा सरदार पटेल इन हस्तियों ने पथिक जी के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान की मुक्तकंठ से प्रशंसा की है।
वे भारत माता के सच्चे सपूत थे।
गुर्जर जाति को ऐसे राष्ट्रभक्तों ने ही निहाल किया है।
हमें गर्व है कि हमनें गुर्जर जाति में जन्म लिया है।

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