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सोमवार, 31 जुलाई 2017

पर्यावरण संरक्षण के क्षैत्र में समर्पित एक सामाजिक यायावर.....

प्रोफ़ेसर पिता का पुत्र होने के बावजूद मेरा जन्म गांव में हुआ | बचपन गांव में बीता हायर सेकेंडरी तक की शिक्षा ग्रामीण परिवेश में ही संपन्न हुई | हालांकि मेरा गांव एक विशाल मैदान के बीच में स्थित है | जिसके चारों ओर विंध्याचल की ऊंची नीची- पर्वत श्रेणियां फैली हुई है, यह पर्वत श्रेणियां वनाच्छादित थी | हालांकि अब भी है पर अब वह बात नहीं | गांव के चारों ओर आम के सघन बगीचे थे | जिनमें विशालकाय आम के दरख्त थे इसके अलावा पीपल, नीम, बरगद, करंज, इमली आदि के वृक्ष भी थे | गांव के बाजू में बहती नदी सदानीरा थी, जिसम 10 -15 फीट की गहराई तक पानी भरा रहता था | नदी के किनारे अर्जुन और गूलर के वृक्षों से ढके थे | कुएं पूरे वर्ष पर्याप्त पानी देते थे  | गर्मी के मौसम में तापमान 42 डिग्री से ज्यादा नहीं हुआ करता था, रात के समय छत पर रजाई ओढ़ कर ही सोना पड़ता था |

               समय बदला सिंचाई के साधनों के व्यापक प्रचार-प्रसार के कारण, बोरवेल के कारण, गिरते भूजल स्तर एवं नदी के पानी के अनियंत्रित दोहन से लगभग 20 वर्ष पहले नदी सुख गई |

                 बचपन में पेड़ पौधे लगाने का शौक मुझे माता- पिता एवं दादा से मिला माताजी घर की क्यारियों में फूलों के पौधे लगाया करती थी | पिताजी शहर आने- जाने के सिलसिले में घर पर विभिन्न प्रजातियां के पौधे लाया करते थे |  दादाजी आम, जामुन, नीम, करंज, इमली, सागौन, जामुन आदि के बीज संग्रह करते थे | जिन्हें वो कच्चे रास्तों और नदी के किनारों पर लगा देते थे | आज भी उनके लगाए सैकड़ों पेड़ शान से खड़े हुए हैं |

             मैं बचपन से ही अपने स्तर पर अपनी निजी कृषि भूमि पर पेड़ पौधे लगाता रहा | पर    व्यवस्थित रुप से निजी/ सार्वजनिक भूमि पर वृक्षारोपण करने /करवाने का सिलसिला मैंने वर्ष 2005 से प्रारंभ किया | अपने घर में भी निजी साधनों से एक छोटी नर्सरी तैयार कर प्रतिवर्ष कम से कम 2000 पौधे लगाने/बांटने का सिलसिला प्रारंभ किया | गांव की प्रचलित परंपरा के अनुसार सर्वप्रथम ग्रामीणों ने उपहास किया | विरोध किया और यहां तक कि मेरे लगाए पेड़ पौधों का नुकसान भी किया | गांव के मंदिर की भूमि पर कब्जा करने वाले एक परिवार के साथ मेरे वृक्षारोपण को लेकर कोर्ट में केस तक चला.... पर कुछ सहयोगियों के साथ मेरा कारवां बढ़ता ही गया साथ में मेरा समर्थन भी ! आज तक में 10000 से भी ज्यादा वृक्ष लगा चुका हूं | गांव फिर से हरा-भरा हो गया है , नदी में पानी अब भी नहीं रहता पर नदी और सभी नालों के किनारे आज हरे भरे हैं |

    अब तमन्ना यह है कि नदी में वर्ष भर पानी रहे ....नदी बहती रहे.....
मेरा अभियान आज भी जारी है | आइए हम सब मिलकर हरा भरा भारत बनाएं | क्या इस अभियान में आप मेरा साथ देंगे..??
          

चौधरी राजेश मोहन (एड•)

मो•- 7773880410

ग्राम- छिंदली , पोस्ट बिजौरा तहसील देवरी जिला सागर (म•प्र)

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