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सोमवार, 31 जुलाई 2017

यह कोई आलोचना नहीं है!

यह कोई आलोचना नहीं है!

आजकल देखने में आता है कि हमारे अधिकांश गुर्जर संगठन नवनिर्वाचित जन प्रतिनिधियों के स्वागत कार्यक्रमों का लगातार एक के बाद एक आयोजन करने लगते हैं. उसी कार्यक्रम में गुर्जर प्रतिभाओं का सम्मान भी किया जाता है. जिन बच्चों ने पढाई में अच्छे अंक प्राप्त किये हैं, उन्हें भी सम्मानित कर दिया जाता है. और फिर होते हैं भाषण जिनमें या तो वक्ता गुर्जर इतिहास बताने में लग जाता है या फिर जाने अनजाने आत्म प्रतिष्ठा के समुद्र में गोते लगाने लगता है.

ऐसे ही एक कार्यक्रम में मुझे एक बच्चा मिला था जिसने अपना दर्द मेरे साथ शेयर किया था. उस बच्चे ने 10वीं कक्षा में जिले में टॉप किया था जिसकी वजह से उसे लगभग एक दर्जन कार्यक्रमों में सम्मानित किया जा  चुका था. उसने बताया मैं इतनी दूर से धक्के खाता हुआ अपने खर्चे से कार्यक्रम में पहुँचता हूँ. अपना पढाई का समय ख़राब करता हूँ. जबकि यहाँ  एक सर्टिफिकेट और ट्राफी देकर विदा कर दिया जाता है. हाई स्कूल में यदि गरीबी के श्राप को झेलते हुए मैंने टाप किया तो अपनी मेहनत से. पढाई के समय मदद के लिए न तो कोई संगठन सामने आया और न ही कोई व्यक्ति. भविष्य में मेरी या मेरे जैसे अन्य छात्र अपनी पढाई को आगे कैसे जारी रखेंगे, क्या किसी को कोई चिंता है? दिल्ली में जब कोचिंग के लिए आते हैं तो अपनी जमीन को बेच कर या गिरवी रख कर आते हैं ताकि खर्चा पूरा कर सकें. उसने   सवाल किया कि क्यूं नहीं ये संगठन आगे आकर कुछ ठोस काम करते? उसकी बातों ने मुझे निरुत्तर कर दिया.

केपीसिंह गुर्जर
राष्ट्रीय महासचिव- भारतीय गुर्जर परिषद

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