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रविवार, 30 जुलाई 2017

राग गुर्जर के बिना संगीत अधूरा

भिन्न भिन्न प्रकार के संगीत राग गुर्जर नाम पर रखे गये जैसे कि गुर्जर राग , गुर्जर मल्हार, गुर्जर भैरवी  आदि।
इन्हें आज भी इसी नाम से याद किया जाता है ।
आभूषणो के नाम भी गुर्जरो पर है। प्राचीन काल में गुर्जर सुन्दर आकृति का हार पहनते थे आज भी उसे गुर्जर हार कहते हैं । इसी प्रकार औरतो के आभूषण  पहुँची या कंगन को गूजरी कहते हैं ।
इसका पदमावती कवियत्रि की संस्कृत कविता में एक संदर्भ भी मिलता है जिसको वेणिदत्ता ने अपनी पुस्तक पागयवेणि में उदधृत किया है। इसका एक पधांश मि. हाल ने जर्नल आँफ दी अमेरिकन ओरियन्टल सोसायटी भाग 6 पृष्ठ 524 पर लिखा है। उस पधांश की अन्तिम पंक्ति निम्न प्रकार है :
    भाताह कंगट गुरजरी सु ललिते बहु लते मनमते।

अनुवाद- हर स्त्री की हार्दिक इच्छा अपनी भुजाओ को गुर्जरी पहुँची या कंगन से सजाने की होती है।

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