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बुधवार, 27 सितंबर 2017

शक - सीथियन (Shaka - Scythians - Gurjar) - गुर्जर

शक - सिथियन  Shaka - Scythians - Gurjar - गुर्जर

प्रसिद्ध विद्वान कनिंघम का मानना है कि गुर्जर सिथियन ( शक ) और कुषाण जनजातियों के वंशज हैं , ओर गुर्जर ही कुषाण और शक के असली प्रतिनिधित्व हैं|

भारत , ईरान , उज़बेकिस्तान , ताजिकिस्तान , गुज्जरिस्तान , अफ़ग़ानिस्तान , पाकिस्तान , स्पेन , ईरानशहर , किर्गिज़स्तान, ईराक आदि मध्य एशिया के देशो में अनेको स्थानों के नाम गुर्जर बिरादरी के नाम से आज भी जाने जाते हैं| हम मध्य एशिया के उन ताकतवर कबीलो के वंशज हैं , जिनका डंका एशिया से लेकर युरोप तक के देशो मे बजा हैं| इसी कारण से आज भी मध्य एशिया के 11 देशो मे गुर्जरों के नाम पर आपको अनेको स्थान की जानकारिया मिल जाएँगी , जो हमारे गुर्जर कबीलो के जीत की निशानी को दर्शाता हैं|

शक प्राचीन मध्य एशिया में रहने वाली स्किथी लोगों की एक जनजाति या जनजातियों का समूह था। इनकी सही नस्ल की पहचान करना कठिन रहा है क्योंकि प्राचीन भारतीय, ईरानी, यूनानी और चीनी स्रोत इनका अलग-अलग विवरण देते हैं। फिर भी अधिकतर इतिहासकार मानते हैं कि 'सभी शक स्किथी थे, लेकिन सभी स्किथी शक नहीं थे', यानि 'शक' स्किथी समुदाय के अन्दर के कुछ हिस्सों का जाति नाम था। स्किथी विश्व के भाग होने के नाते शक एक प्राचीन ईरानी भाषा-परिवार की बोली बोलते थे और इनका अन्य स्किथी-सरमती लोगों से सम्बन्ध था। शकों का भारत के इतिहास पर गहरा असर रहा है क्योंकि यह युएझ़ी लोगों के दबाव से भारतीय उपमहाद्वीप में घुस आये और उन्होंने यहाँ एक बड़ा साम्राज्य बनाया। आधुनिक भारतीय राष्ट्रीय कैलंडर 'शक संवत' कहलाता है। बहुत से इतिहासकार इनके दक्षिण एशियाई साम्राज्य को 'शकास्तान' कहने लगे हैं, जिसमें पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, सिंध, ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा और अफ़्ग़ानिस्तान शामिल थे।

बनने चले थे कुषाण गुर्जरों की संतान , अब तो शक गुर्जरों की संतान भी नही रहे , क्यूकि की प्रसिद्ध विद्वान कनिंघम का मानना है की शक भी मुलतः गुर्जर हैं|

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