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रविवार, 14 जनवरी 2018

राष्ट्रीय गुर्जर नेता चौधरी नेपाल सिंह कसाना ने अपना दल (एस) का दामन क्यों थामा, पढ़िए पूरी कहानी

#मैने_अपना_दल_एस_क्यूँ_ज्वाइन_किया
पिछले कई दिनों से तमाम साथी ओर शुभचिंतक लगातार ये प्रश्न कर रहे है कि हमने अपना दल(एस) को क्यों चुना??आखिर कैसे अपना दल(एस) के झंङे के नीचे पिछङो दलितो वंचितों शोषित किसान कमेरो का हित ओर राजनैतिक अस्तित्व मजबूत होगा???
इन सभी सवालों ओर जिज्ञासाओं को मै दूर करने के लिए आप लोगों के बीच हूँ।
सबसे पहले तो मै आपको अपनी सामाजिक ओर राजनैतिक पृष्ठभूमि से अवगत कराता चलता हूँ।मुझे 30 वर्ष का समाजिक एवं राजनैतिक अनुभव है। मैं  M.Sc. BEd हूँ, आयु 59 वर्ष है। सारे देश का भ्रमण कर चुका हूँ। गूर्जर समाज की विभिन्न गतिविधियों से 1975 से जुड़ा हूँ। कोई भी गुर्जर बाहुल्य क्षेत्र पुरें देश मे ऐसा नहीं है जिससे मैं परिचित नहीं हूँ। 7 राज्यों मे गुर्जर बाहुल क्षेत्रों मे हमारे परिवार काफ आर्थिक योगदान रहा है।मेरा पुरा परिवार भाई बहन बेटा बेटी सभी उच्च शिक्षित है ओर पुरे देश के विभिन्न प्रदेशो पिछले 35 साल से लगातार हमारी कंपनी के निर्माण कार्य संचालित है।शिक्षा के क्षेत्र मे विशेष कार्य करके पुरे देश मे विशेष ख्याति अर्जित की है।सामाजिक कार्य करने के कारण हर वर्गके लोगो का प्यार दुलार ओर सम्मान प्राप्त किया है।सर्वसमाज ने हमेशा से हमे ओर हमारे प्यार को सम्मान ओर प्यार से नवाजा है। कवि एवं पत्रकार होने के कारण देश विदेश के इतिहास का काफी अधययन किया हैं।ओर यूरोप के कई देशो का भ्रमण अब से 20 साल पूर्व कर चुका हूँ।अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद पर वर्तमान मे कार्यरत रहकर समाज के कार्यो से जुङा हुआ हूँ। 2002 मे विधान परिषद स्नातक चुनाव मैने समाजवादी पार्टी से लङा ओर उपविजेता रहा।
14 वर्ष महान किसान नेता श्री राजेश पायलट के साथ तथा 15 वर्ष समाजवादी पार्टी मे रहकर यह अनुभव प्राप्त किया कि किसी भी जाति का महत्व उसकी संख्या, सगठन, एकता एवं उस जाति का अपने किसी लीडर को राजनीति के उच्च शिखर पर पहुचाने का जुनून होता हैं।
इतिहास के पन्नों को पढकर मैं इस निर्णय पर पहुंचा कि महान गुर्जर सम्राट कुषाण वंश (सन् 25 से 395) ,गूर्जर हूण सम्राट (सन 440से 495),  कन्नौज के महान प्रतापी गूर्जर प्रतिहार सम्राटों(सन525 से 1090) ने इस देश पर हजारों साल तक राज्य किया। 300 वर्षों तक अरबों के आक्रमण से गुर्जर प्रतिहार सम्राटों ने इस भारतीय संस्कृति को इस्लाम धर्म में परिवर्तित होने से बचाया। 1019 में महमुद ग़ज़नवी के आक्रमण से गुर्जर प्रतिहार वंश का उत्तर प्रदेश की कन्नौज राजधानी से शासन का  पतन के बाद -गुर्जर जाति की शौर्य गाथा खत्म हो गयी। परिणाम स्वरुप गुर्जर जाति के मूल से - 36 वंश राजपूत के, 70%कुर्मी, 80%पाटीदार ,60% मराठा की अनेको उप जातियों का उद्भव  हुआ। शेष गुर्जर क्षत्रिय 1090 से 1947 तक  निरन्तर सत्ता से टकराता रहा।परिणाम,अशिक्षा, विद्रोही स्वभाव, आर्थिक क्षति, सत्ता से दूर होना।
देश धर्म ओर राष्ट्र के लिए इतना बङा अदम्य साहस दिखाने के बाद भी महान गुर्जर सम्राट मिहिरभोज को देश के सत्ताधारी लोगों ओर सरकारो द्वारा इतिहास मे अनदेखा कर दिया गया। यहां तक कि महान प्रतापी सम्राट शिवाजी का राजतिलक तत्कालीन पुजारियों द्वारा पैर से अंगुठे से किया। आजाद भारत मे सरदार पटेल को प्रधानमंत्री बनने से रोका गया।वर्तमान मे उत्तर प्रदेश मे सरकार मे किसी गुर्जर को मंत्री मंङल का हिस्सा नहीं बनाया गया।गुजरात मे 88 पटेल विधायक सदन मे होने के बाद भी किसी पटेल को मुख्यमंत्री बनाये जाने लायक नही समझा गया। वर्तमान मे किसी गुर्जर कुर्मी या पटेल समुदाय के व्यक्ति को केन्द्रीय मंत्रीमंङल मे कैबिनेट स्तर का पद नही दिया गया।चाहे कभी वो राजेश पायलट रहे हो या संतोष गंगवार हो या फिर सचिन पायलट हो।
आज उत्तर प्रदेश, दिल्ली,उत्तराखंड, हरियाणा,पंजाब,हिमाचल, जम्मू कश्मीर, राजस्थान, मध्यप्रदेश,गुजरात एवं माहाराष्ट का हिन्दू मुस्लिम सिक्ख गुर्जर समाज आर्थिक एव शिक्षा के क्षेत्र मे बहुत आगे बढ गया है। अपनी खो हुई प्रतिष्ठा पुनः पाने के लिये उठ खड़ा हुआ है। राजस्थान  मे गूर्जर आरक्षण की माँग, गुजरात मे पाटीदार आरक्षण की माँग, महाराष्ठ मे मराठा आरक्षण की माँग पुरे देश मे गुजं रही है। लेकिन इतना सब होने के बाद भी हमारी मांगे नजरअंदाज की गई है ओर वो राजनैतिक हक हम लोगो को नही मिल पाया जिसके हम अधिकारी है।राजस्थान मे 72 कुर्बानियो के बाद भी, गुजरात मे 14 पाटिदारो की हत्या मंदसौर मे 8 पाटिदार किसानों की हत्या के बाद भी आखिर हमे क्या मिला?? हमारे संघर्ष ओर बलिदान का परिणाम क्या हुआ?? हम वहीं खङे रह गये जहा खङे थे।इसका कारण था हमारी आवाज ओर संघर्ष का एकजुट रूप ना होना, हमारा विखंङित होना।
आजादी के आज़ादी के बाद भी एक विशेष वर्ग के लोग राजनैतिक सत्ता पर काबिज है ओर दलित पिछङे गरीबो का सिर्फ शोषण ओर इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए इन लोगो द्वारा किया गया।
ये वही लोग है जिन्होने बाबा साहब अंबेडकर को चुनाव जीतने नही दिया।ओर समाज ओर देश को जातिगत रूप से बाँट कर रखा।
जो क्षत्रिय कभी सम्राट हुआ करते थे उनकी संतानों को इन लोगों ने पिछङे ओर अनुसूचित जाति के स्तर तक पहुंचा दिया।
पिछङो के आरक्षण की मांग जो नेहरू के समय से ही उठती आ रही है।उसको हमेशा दबाने का काम किया गया।जनता दल की सरकार के दौरान पूर्व प्रधान मंत्री चौधरी चरण सिंह के कार्यकाल के दौरान मंङल आयोग का गठन हुआ मगर कांग्रेस की सरकार ने उस रिपोर्ट को दबाया रखा। पुनः जनता दल की सरकार बनने पर बेहद ईमानदार उच्च शिक्षित महान व्यक्तितव के धनी वीपी सिंह के प्रधानमंत्री बनने पर मंङल आयोग की रिपोर्ट को लागू किया ओर उच्च श्रेणी के लोगों के विरोध को विरोध को दरकिनार कर दिया।
ये उच्च श्रेणी के लोग आज भी देश की न्याय व्यवस्था राज व्यवस्था ओर प्रशासनिक व्यवस्था पर काबिज है ओर दलितो पिछङो के हक को दबाये बैठे है।
आरक्षित वर्ग के लोगों के अधिकारों का हनन हो रहा है मगर फिर भी वो लोग जै कभी आरक्षण के हिमायती रहे है चुप है क्योंकि उनके अपने व्यक्तिगत राजनैतिक स्वार्थ है।ओर वो आरक्षित वर्ग के लोगो के हक मे बोलने पर खुद को असुरक्षित महसूस करते है।
देश की अर्थव्यवस्था ओर निजी क्षेत्रो मे उच्च वर्ग के लोग बहुतायत मे है।ओर ये 15% लोग देश के 50% संसाधनो उपयोग करते हुए 85% लोगों के अधिकारों का दोहन कर रहे है।
इसलिए आज आवश्यकता है इस पिछङे दलित वंचित शोषित वर्ग के लोगो की हको की लङाई को संगठित होकर लङा जाए। जिस तरह मौर्य,कुशवाह,सैनी,शाक्य उपजातियो का एक साथ आने से उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य मे सत्ता मे अपनी भागीदारी प्राप्त कर ली है। उसी तरह गूर्जर,कुर्मी, पाटीदार, मराठा को भी एक झण्डे के नीचे  आना होगा।
झण्डा अपना दल (एस )  पार्टी का मौजूद है।अपना दल(एस) के वर्तमान मे उत्तर प्रदेश मे 9 विधायक है और 2 सांसद है।उत्तर प्रदेश सरकार मे कारागार मंत्री अपना दल से है तो खुद 35 वर्षीय माननीय अनुप्रिया पटेल जी केन्द्रीय सरकार मे मंत्रीमंङल मे शामिल है।
शानदार व्यक्तित्व की धनी उच्च शिक्षित, प्रखर वक्ता, युवानेत्री , श्रीमती अनुप्रिया पेटल केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री एवं राष्ट्रीय संयोजिका अपना दल (एस)सम्पूर्ण राष्ट्र के  दबे ,कुचले,पिछड़े, किसान एवं कमेरौ की आवाज उठाने के लिये तैयार है। उनका कहना है कि-सत्ता और पद सुख भोगने के लिये नहीं है। यह तो दबे, मपिछड़े, कमेरो एवं गरीबों के कल्याण और उनकी सेवा के लिए होती है। इसीलिए मैंने उसी पीड़ा के साथ अपने इतिहास की सभी अपनी मूल जातियों की एक एकता तथा सत्ता केउच्च शिखर पर देखने के लिए अपने रक्त संबंधी पार्टी का दामन थामा है। आजाद देश के महान नेता, भारत रत्न लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के एक ही वंशज  होने के कारण हम पूरी ताकत झोंककर अपनी नेता श्रीमती अनुप्रिया पटेल को महान नेत्री बना सकते हैं।हम सभी को विशेषकर युवाओं को गैर इनंसाफी के खिलाफ एक आवाज  बनकर हमें घर से निकलकर सड़कों पर आना होगा तथा देश के सभी जाति ,धर्म के लोगो को प्रेम व सम्मान के साथ अपने झण्डे के नीचे लाना होगा। मेरी प्रतिज्ञा, निष्ठा और तन ,मन, धन ताउम्र उनके साथ रहेगा।
अगर हम लोग संगठित हो जाए तो एक बङी राजनैतिक ताकत देश मे बन सकते है।गुर्जर कुर्मी पटेल पाटीदार मराठा आज देश मे 27 करोङ है।जो खुद मे एक बहुत बङी  राजनैतिक ताकत है।
जय मिहिरभोज।। जय शिवाजी।।जय सरदार।।
जय गुर्जर।।जय कुर्मी।।जय पाटीदार।।जय मराठा।।

चौधरी नेपाल सिंह कसाना
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष/पश्चिमी उप्र प्रभारी/राजस्थान प्रभारी
अपना दल (एस)

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