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गुरुवार, 8 फ़रवरी 2018

गुर्जर - प्रतिहारों के हूण पुरखें (प्रतिहारों के पितामह राष्ट्ररक्षक हूण)

गुर्जर - प्रतिहारों के हूण पुरखें (प्रतिहारों के पितामह राष्ट्ररक्षक हूण) -

इतिहासकार वी ए. स्मिथ , विलियम क्रुक एवं रुडोल्फ होर्नले गुर्जर प्रतिहारो को हूणों से सम्बंधित मानते हैं|

स्मिथ कहते हैं की इस सम्बन्ध में सिक्को पर आधारित प्रमाण बहुत अधिक प्रबल हैं| वे कहते हैं कि हूणों तथा भीनमाल के गुर्जरों, दोनों ने ही सासानी पद्धति के के सिक्के चलाये|होर्नले गुर्जर-प्रतिहारो को ‘तोमर’ मानते हैं तथा पेहोवा अभिलेख के आधार पर उन्हें जावुला ‘तोरमाण हूण’ का वंशज बताते हैं|पांचवी शताब्दी के लगभग उत्तर भारत को विजय करने वाले हूण ईरानी ज़ुर्थुस्थ धर्म और संस्कृति से प्रभावित थे|

वो सूर्य और अग्नि के उपासक थे जिन्हें वो क्रमश मिहिर और अतर कहते थे| वो वराह की सौर (मिहिर) देवता के रूप में उपासना करते थे| हरमन गोएत्ज़  इस देवता को मात्र वराह न कहकर ‘वराहमिहिर’ कहते हैं|

मुख्य तर्क यह हैं कि हूण और प्रतिहारो के इतिहास में बहुत सी समान्तर धार्मिक एवं सांस्कृतिक परम्पराए हैं, जोकि उनकी मूलभूत एकता का प्रमाण हैं| कई मायनो में प्रतिहारो का इतिहास उनकी हूण विरासत को सजोये हुए हैं| प्रतिहार वंश की उत्पत्ति हूणों से हुई थी तथा उन्होंने हूणों की विरासत को आगे बढाया था|

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