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रविवार, 4 मार्च 2018

एक अपील समस्त गुर्जर समाज के नाम

लोग नासमझ  नहीं है बस  आलसी हैं नहीं तो जिस कनिष्क का डंका दो हजार साल बाद भी बजता हो उसे याद करने में इतनी ढील कोई क्यों बरते ? अब हमें एकजुट होकर इस २२ मार्च को अन्तराष्ट्रीय गुर्जर दिवस के अवसर पर सम्राट कनिष्क को याद करना चाहिये नहीं तो एक दिन आयेगा जब हम अपने ही पुरखो को भुला कर दूसरे के पूर्वजो को पूज रहे होंगे।
आज तक गुर्जर समाज इतना भोला कैसे बना हुआ है जब पूरे देश में दुनियाभर के अशोकनगर है , विक्रमादित्य मार्ग है , हर्षवर्धन के किस्से हैं,चन्द्रगुप्त की चर्चा है , समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन कहा जा रहा है , राजेन्द्र चोल व कृष्णदेवराय को इतना सम्मान मिल रहा है तब हमारी त्रिमूर्ति यानी कनिष्क,मिहिरकुल व मिहिरभोज की कोई सुध क्यों नहीं ले रहा । पहले सुध हम लें तभी तो दूसरा भी कुछ करेगा ,कहेगा। हम ही शुतुरमु्रग की तरह घुटनो में टांग छिपाकर खडे हैं आखिर इतनी बेरुखी क्यों?
हमें आज से अब से यहीं प्रण लेने होंगे कि २२ मार्च को अन्तराष्ट्रीय गुर्जर दिवस, १० मई का क्रान्ति दिवस, मिहिरभोज महोत्सव,सावन की शिवरात्रि को मिहिरकुल हूण स्मृति दिवस मनाने की नींव डालनी होगी। ये नींव साल तक साल एक ऐसा ईमारत में तब्दील हो जानी चाहिये जिसे देखकर दुनिया हमें सलाम करें हमारी देन को सराहे।
बस इसके लिये हमें आज आगे आकर मेहनत करना होगा खाली गालबजाई का कोई फायदा नहीं ।
भाइयो फिर से कहते हैं कि २२ मार्च को अन्तराष्ट्रीय गुर्जर दिवस मनाओ ,घर घर दीप जलाओ , खुशियो के गीत गाओ।
कनिष्क को स्मरण करो ।।
नन्दलाल गुर्जर
सम्पादक : पथिक टुडे
सम्पर्क 9166904121

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