Google+ Badge

Google+ Badge

Google+ Badge

बुधवार, 25 अप्रैल 2018

रैबारी और गुर्जर समाज के साथ रची जा रही भयानक साजिश !

आपको मालूम होगा कुछ महीनों पहले श्री उम्मेदसिंह जी रैबारी के प्रयासों से राजस्थान सरकार ने गुर्जर और रैबारी समुदाय को विमुक्त, घुमन्तु व अर्द्धघुमन्तु सूची में शामिल करने हेतु पत्र भारत सरकार को भेजा था तब उम्मीद बंधी थी कि 'विमुक्त, घुमन्तु व अर्द्धघुमन्तु जनजाति आयोग' द्वारा जिसमे हमारी गुर्जर जाति भी शामिल होगी और हमे फायदा व कुछ सरंक्षण मिलेगा, यथा घुमन्तु वर्ग के तहत आरक्षण का प्रावधान हो सकता था, जिसे कोई कोर्ट नकार नही सकता।
  परन्तु केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के द्वारा पश्चिमी और दक्षिणी भारत के घुमन्तु व अर्द्धघुमन्तु वर्गों की जो सूची बनाई गई है, जिसमे मध्यप्रदेश, गुजरात भी शामिल है (गौरतलब है कि इन राज्यों में गुर्जर व रैबारी घुमन्तु समुदाय निवास करता है)। इन दोनों राज्यों की सरकारों की सिफारिश के बावजूद यहाँ निवासित गुर्जर व रैबारी समाज को इस सूची से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।
   अब जबकि केंद्र सरकार ने इन राज्यों में हम घुमन्तु वर्ग में शामिल नही किये गए तो यह निश्चित है कि उत्तर भारत की आने वाली सूची(जिसमे राजस्थान भी है) में भी हमे शामिल नही किया जाएगा।
   लोकधारा संगठन के प्रदेशाध्यक्ष उम्मेद सिंह रैबारी एवं पथिक सेना संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष महावीर पोसवाल ने अथक परिश्रम करके केंद्रीय डीएनटी बोर्ड में गुर्जर, रैबारी, बंजारा, गायरी, गाडोलिया जातियों के महत्वपूर्ण दस्तावेज रखे एवं इन समुदायों की मूलभूत परेशानियों से अवगत कराकर इन समुदायों को केंद्र सरकार द्वारा घुमन्तु जनजाति की सूची में शामिल करने हेतु महत्वपूर्ण तथ्य रखे| आप अच्छी तरह समझ सकते हैं कि राजस्थान सरकार ने तो इस सूची हेतु स्वयं हमारे समाज का नाम भी नही भेजना चाहा था अगर उम्मेद सिंह रैबारी प्रयास न करते तो राजस्थान सरकार रिपोर्ट ही केंद्र सरकार को नहीं भेजती|
  इन प्रयासों के बाद जब राजस्थान सरकार ने हमारे समाज को सूचीबद्ध कर केंद्र सरकार को भेजा, परन्तु अब लगता नही कि हमे शामिल किया जाएगा।
  अंदरखाने क्या खेल चल रहा है, आप समझ सकते हैं।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें