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शनिवार, 28 अप्रैल 2018

पाटीदार गुर्जर महाकुंभ के मुख्य अतिथि होंगे नेपाल सिंह कसाना

पाटीदार गुर्जर महाकुम्भ के मुख्य अतिथि होंगे चौधरी नेपाल सिंह कसाना

गुर्जर समाज के प्रबुद्ध साथियों!!
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, सहकार महर्षि, अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष गुर्जर गौरव परम आरणीय स्वर्गीय श्री पीके अन्ना पाटिल जी के द्वारा गुर्जर समाज को ऊंचाई तक पहुंचाने की मुहिम को उनके वारिस एवं यशस्वी पुत्र श्री दीपक भाई पाटिल जो कि अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष है, पीके अन्ना पाटिल द्वारा स्थापित गुर्जर समाज की सभी सहकारी संस्थाओं के चेयमैन है साथ ही महाराष्ट्र लेवा पाटीदार गुर्जर संघ के अध्यक्ष है। अपने पिता के समाजिक कार्य करने की मुहिम को आगे बढ़ाते हुए 30अप्रैल2018 को 33 गुर्जर कन्याओं के सामूहिक_विवाह का आयोजन लेवा पाटीदार गुर्जरों के 15000 आबादी के प्राचीन गांव प्रकाशा तहसील शहादा जिला नंदुरबार महाराष्ट्र में आयोजन किया जा रहा है। जिसमें मध्यप्रदेश गुजरात महाराष्ट्र के 2सांसद, 9वर्तमान विधायक , महाराष्ट्र सरकार के 3 मौजूदा मंत्री, पूर्व गृह राज्य मंत्री भारत सरकार, 4 पूर्व मंत्री एवं अन्य पूर्व विधायक एवं सांसद आमन्त्रित है।
जिसमें गुर्जर समाज के 12-13 हजार लोगों की उपस्थिति की संभावना है।
उत्तर भारत के समस्त गुर्जर समाज को सम्मान देने के लिए मुझे इस पूरे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर भारत के गुर्जर समाज का प्रतिनधित्व करने का सौभाग्य प्रदान किया है। मैं भी उत्तर भारत के समस्त गुर्जर समाज की ओर से गुजरात और महाराष्ट्र के गुर्जरों को प्यार और सम्मान देने के लिए पहुंच रहा हूं।

समस्त उत्तर भारत के गुर्जर समाज के प्रबुद्ध साथियों आपकी जानकारी हेतु मै सहर्ष आपको बताना चाहता हूं कि गुजरात और महाराष्ट्र दोनों प्रांतों की सीमाओं के दोनों ओर माही और ताप्ती नदी के आंचल में बसने वाले लेवा पाटीदार गुर्जर 90 किमी चौड़ाई और 150 किमी लंबाई में रहने वाले(केवल गुजरात के दक्षिणी और महाराष्ट्र के उत्तरी भाग) गुर्जर लेवा पाटीदारो के सर्वमान्य राजनैतिक आर्थिक सामाजिक सांस्कृतिक और सहकारी आंदोलन के नेता स्वर्गीय पीके अन्ना पाटिल थे।जो हमारे अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के 35 साल तक राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। मैंने उनके साथ अखिल भारतीय गुर्जर महासभा में राष्ट्रीय महामंत्री के रूप में कार्य किया है। पीके अन्ना पाटिल तहसील शाहदा जिला नंदुरबार के रहने वाले थे।वो एक प्रखर अधिवक्ता थे। उन्होंने इस बताए क्षेत्र के समस्त गुर्जर किसानों को सहकारिता संघ के अन्तर्गत सदस्य बना कर के उन्नत खेती करना सिखाया। 500 एकड़ में सुगर मिल की स्थापना की।
एवं 6 अन्य औद्योगिक इकाइयां है। 250 एकड़ में आधुनिक मशीनों से युक्त टेक्सटाइल मिल है। 200 एकड़ में  लडके लड़कियों के लिए इंजीनियरिग कॉलेज पॉलीटेक्निक कॉलेज इंटर कॉलेज डिग्री कॉलेज कृषि महाविद्यालय सन 70 के दशक में ही बनवा दिए थे।जिनके मालिक इस क्षेत्र के गुर्जर किसान भाई है। हजारों बीघा के गुर्जर जमींदार किसान है। अधिकांश बच्चे उच्च शिक्षित है और विदेशो मे कार्यरत है।खेतो में आदिवासी काम करते है। गन्ना केला कपास प्रमुख फसल है।
बिना दहेज बिना किसी दिखावे के सुबह 9 से दोपहर 2 बजे के बीच श्री पी के अन्ना पाटिल की इस क्षेत्र के गुर्जर समाज की शादी करा दिया करते थे।श्री पाटील जी एक बार जनता पार्टी के काल में विधायक रहे और महाराष्ट्र जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे।उनके सामाजिक कार्यों को देख कर महाराष्ट्र और गुजरात के अन्य सभी पार्टियों के राष्ट्रीय नेता और मंत्री उनको अकूत सम्मान देते थे।अधिकांश उनको चरण स्पर्श कर अभिवादन करते थे।अखण्ड भारत के शिल्पी लोहपुरुष सरदार पटेल इन्हीं के परिवार से सम्बन्धित थे।उपरोक्त 13500 वर्ग किमी क्षेत्रफल की जमीन के मालिक 90% गुर्जर किसान है।
वहां के गुर्जर किसान उच्च संस्कारवान बड़ी बड़ी कोठियों के मालिक और उच्च चरित्र के धनी है। हालाकि गुजरात और महाराष्ट्र में अन्यत्र भी गुर्जर रहते हैं जो बड़े व्यापारी और बड़े किसान है।सूरत अहमदाबाद बड़ोदरा और भरुच में रहने वाले गुर्जरों के भी 11 शुगर मिल है। बारदोली का शुगर मिल भारत का सबसे बड़ा शुगर मिल है जिसके मालिक केवल गुर्जर किसान है।आपको बताता चलु
की लगभग 1000 साल पहले जब अरब और मोहमद गजनवी के भीषण आक्रमणों से पहले आज के पाकिस्तान में गुर्जरों के बहुत सारे राज्य थे। जिन्होंने दशकों तक अरबों के आक्रमण झेले। अरबों को भारत में नहीं घुसने दिया। अंततः महमूद गजनवी के 1020 इस्वी के करीब आक्रमण से सारे गुर्जर एवं अन्य राजाओं की हार हुई और बचे हुए गुर्जर जो राज परिवार या जमीदार परिवारों से संबंधित लेवा खाप के गुर्जर तथा इन्हीं लेवा जमीदारो की खेती करने वाले कड़वा खाप के गुर्जर साथ साथ विस्थापित होकर कुछ दशकों तक राजस्थान में रुकने के बाद अच्छी उपजाऊ जमीन की तलाश में माही और ताप्ती नदी के इस क्षेत्र में आके स्थापित हो गए तथा बाकी लेवा कड़वा गुर्जर महाराष्ट्र और गुजरात के अन्य क्षेत्रों में जाकर बस गए।लेवा खाप के गुर्जर क्यूंकि धनवान परिवारों से थे इसलिए उन्होंने गुजरात और महाराष्ट्र के नीवर्तमान शासकों से कई कई हजार लाखो एकड़ ज़मीन पट्टे  पर लेकर अपने कड़वा गुर्जर भाईयो को किसानी करने के लिए दे दी थी। इसीलिए दोनों खाप के लोग पटेल पाटिल और पाटीदार कहलाए। लेवा और कड़वा गुर्जरों में आर्थिक असमानता होने के कारण आज भी शादी ब्याह नहीं होते।सुना है अब कहीं कहीं होने लग गए है। छोटे किसानो के रूप में अन्य कनवी किसानों के साथ ब्याह शादी करने लगे और कृषि कार्य करने के कारण कड़वा और कनवी अपने को कुर्मी कहने लगे। ये ही कड़वा गुर्जर और कनवी मिश्रित किसान कुर्मी एमपी यूपी बिहार में स्थापित होकर आज तक पशु पालन और खेती करते आ रहे है।एमपी के मालवा क्षेत्र के इंदौर संभाग मे उपजाऊ जमीन पर इन्हीं लेवा पाटीदारों में से आकर बस गए थे।जो आज भी वहां मौजूद है।इन्हीं एमपी के लेवा पाटीदारो से गुजरात और महराष्ट्र के लेवा पाटीदारों से आज भी शादी ब्याह हो रहे है। और ये ही कड़वा और लेवा खाप के गुर्जर राजस्थान और एमपी में लौर और खारी के रूप में पहचाने जाते है।युद्ध करने से विमुख होने के कारण अपने खेती और व्यापार में बड़ी लगन से काम करते रहे और किसी शासक से युद्ध करने की नहीं सोची जैसा उत्तर भारत के  गुर्जर हजारों साल से आज तक सत्ता करते आ रहे है।
जबकि महाराष्ट्र में विश्व प्रसिद्ध महान योद्धा गुर्जर गौरव छत्रपति शिवाजी ने ओरंगजेब के खिलाफ युद्ध करने की ठानी थी।उनकी सेना में 60%  जो गुर्जर योद्धा थे उनमें तत्कालीन गुजरात,महाराष्ट्र राजस्थान गुर्जर जाति के महान शासक चालुक्य, सोलंकी, परमार, गहलौत, गुर्जर प्रतिहार वंश के योद्धा थे।
इसी लिए लेवा कड़वा कुर्मी गुर्जर आज समृद्ध है और शिक्षित है।लेवाओ गुर्जर पाटीदारों की संपनता और अधिक संख्याबल के कारण ही गुजरात के जितने भी पाटीदार सीएम हुए है वो लेवा पाटीदार ही हुए है।आज का उभरता युवा नेता हार्दिक पटेल कड़वा खाप का गुर्जर पाटीदार नेता है।
लेकिन वहां के सभी लेवा कड़वा और कुर्मी जो छोटे किसान के रूप में मौजूद है इसीलिए वो आरक्षण की मांग कर रहे है। हालाकि कुछ भाग लेवा गुर्जर पाटीदार के भी छोटे किसानो के रूप में है।
अंत में उपरोक्त जानकारी के अलावा मै ये बताना चाहता हूं कि मै पूरे देश के गुर्जर बहुल राज्यो में किसी ना किसी रूप में सक्रिय हूं।उसके आधार पर आदरणीय स्वर्गीय पीके अन्ना पाटिल से बड़ा गुर्जर समाज का आर्थिक सामाजिक और शैक्षिक परिवर्तन लाने वाला व्यक्ति पूरे देश मे किसी को नहीं मानता। मै सिर्फ और सिर्फ क्रांतिकारी गुर्जर नेता श्री मसूद चौधरी( सेवानिवृत्त आईपीएस एडिश्नल डीजीपी जम्मू कश्मीर )जी के अलावा पीके अन्ना पाटिल को अपना आदर्श पुरुष मानता हूं।उनके द्वारा किए गए कार्यों को मै सलाम करता हू और उनको भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
मेरा मानना है कि उपरोक्त आयोजन से हमारी गुर्जर कुर्मी पटेल पाटीदार पाटिल एवं मराठा को एक मंच पर लाने की मुहिम को बल मिलेगा।
बाकी सूचनाएं आने के बाद...
सधन्यवाद!!!!!!

चौधरी नेपाल सिंह कसाना
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष- अपना दल (एस)
प्रभारी- पश्चिमी यूपी/राजस्थान
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष- अखिल भारतीय गुर्जर महासभा

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