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बुधवार, 1 अगस्त 2018

समाजवादी नेता राजकुमार भाटी ने कहा समाज पॉजिटिव विचार अपनाए।

समाज के अस्वस्थ होने का एक बड़ा कारण मुझे यह नजर आता है कि हम सब ने कर्म और चरित्र पर जोर देना बंद कर दिया है।परिवार, समाज,विद्यालय, राजनीति, धर्म किसी भी जगह कर्म और चरित्र पर जोर नही है। जोर दूसरी बातों पर है।परिवार का जोर है किसी भी तरह ज्यादा से ज्यादा धन कैसे कमाया जाय।समाज का जोर चमक दमक और दिखावे पर है।विद्यालय इस जुगत में लगे रहते हैं कि अभिभावकों की जेब ढीली करनी है।राजनीति साम,दाम, दंड, भेद से सत्ता कब्जाने का काम रह गई है।धर्म मानो कर्मकांड और अंधविश्वास का ही नाम रह गया है।
      इस देश और समाज को मरने से बचाने के लिए जरूरी है कि इन विनाशकारी बातों से लोगों का ध्यान हटाकर कर्म और चरित्र पर लगाया जाय।इसके लिए सबसे पहले यह करना होगा कि हम कर्मवीर और चरित्रवानों कि प्रशंसा करना शुरू करें।हर जगह हर समय हर चर्चा में हमारी कोशिश कर्म और चरित्र के महिमामंडन की हो।
     पहली नजर में यह लग सकता है कि यह तो मामूली बात है और ऐसा तो होता ही है।लेकिन यह मामूली बात नहीं है और ऐसा होता नहीं है।होता तो यह है कि समाज अपना 90% समय चोर,जेबकतरों, उचक्कों और बेईमानों के महिमामंडन में लगाता है।मेरी बात का विश्वास न हो तो आप आज के बाद समाज में कान लगाकर सुनना कि समाज किसका महिमागान करता है। उसने शादी में बहुत धन खर्च किया।उसने बहुत अच्छा मकान बनाया।उसकी ऊपरी कमाई बहुत है।वह चमचागीरी से बहुत बड़े पद पर पहुंचा है।उसने बदमाशी से क्षेत्र में दबदबा बनाया है। 90% ये ही बातें आपको सुनने को मिलेंगी।
      चलो आज से इन बातों की दिशा बदलने की शुरुआत करें।ऐसी बातों के बीच में हस्तक्षेप करने की हिम्मत जुटाएं और चर्चा को चरित्रवान, ईमानदार, परोपकारी लोगों के ऊपर केंद्रित करें।ऐसे लोगों की समाज में कमी नहीं है।बस हम उनकी चर्चा नही करते। चर्चा होने लगेगी तो उनकी संख्या ज्यादा नजर आने लगेगी। अभी तक समाज का नजरिया यह है कि वह केवल सफल आदमी का महिमागान करता है। सफलता किस प्रकार हासिल की गई है इस पर ध्यान नहीं देता। आज से शुरू करें कि हम केवल उन लोगों का महिमागान करें जो सच्चाई और अच्छाई के रास्ते पर चल रहे हैं और अपना कर्म ठीक से निभा रहे हैं।

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