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बुधवार, 8 अगस्त 2018

राजस्थान में आधुनिक विकास के कोसों दूर एक गांव ऐसा भी

आधुनिक विकास से दूर एक गांव ऐसा भी

कोटा। (हरिओम सिंह गुर्जर PRO कोटा)

आधुनिक विकास से दूर एक गांव ऐसा भी
उबड़-खाबड़ रास्तों या यूं कहें पगढ़ड़ियों से होकर सघन वन क्षेत्र में बसे गांव दामोदरपुरा जाना हुआ। रास्ते में कोटा शासक महाराव मुकुन्दसिंह द्वारा निर्मित रावंठा का किला, जंगल के बीच शिकारगाह, एनिकट आज भी अडीग खडे होकर इतिहास का बखान करते प्रतीत होते है। दामोदरपुरा में ना बिजली ना सड़क और ना ही चिकित्सा, शिक्षा की वर्तमान में पहंुच है। सरकार ने यहां सौर उर्जा से बिजली उपलब्ध करवाई, पानी के लिए हैण्डपम्प लगवाये है जो चालू हैं, शिक्षा के उजियारे के लिए प्राथमिक विद्यालय संचालित किया लेकिन समायोजन हो गया।
मुकुन्दरा राष्ट्रीय बाघ अभ्यारण्य में स्थित कोटा जिले के इस गांव ने अनेक झंझावत झेले हैं। गुर्जर बाहुल्य 91 परिवारों के इस गांव में गुर्जरों के 5 गोत्र एवं भील जाति के 7 परिवार निवास करते हैं। गांव में स्थित शिलालेख 13-14 वीं शताब्दी का ज्ञात होता है। इतिहासकार इन घने जंगलों में बसे हुए गांवों को मुगलकाल में अपने धर्म की रक्षार्थ में आकर बसे हुए मानते हैं। आज भी गांव के बूजुर्ग, युवा किसी सेना के सैनानियों से कम नहीं लगते, लम्बी कद-काठी, नुकीली नाक, चौडी बौंहे एवं गठीला बदन वीरों के वंशज होने का स्वतः ही परिचय देते हैं।
गांव के मुख्य मार्ग के समीप पेयजल के लिए ग्रामीणों द्वारा बावड़ी का निर्माण करवाया था जो आज भी सुरक्षित है तथा ग्राम वासियों की सुझबूझ एवं जल संरक्षण की उपयोगिता को दर्शाती है। बावडी के समीप ही सुन्दर नक्कासी युक्त चबूतरे पर भगवान भोलेनाथ की चर्तुमुखी शिवलिंग की प्रतिमा नंदी के साथ विराजमान है। जिससे प्रतीत होता है कि ये लोग शैव मैतयावली थे। गांव के सभी लोगों का वर्तमान में प्रमुख कार्य पशु पालन एवं दूध की बिक्री करना है। कोटा जैसे शैक्षणिक शहर के नजदीक होने के बावजूद आधुनिकता से दूर गांव में आज भी अधिकतर कच्चे मकान हैं। घने जंगल में शुद्व वायु, जल एवं परिवेश के कारण सभी आयुवर्ग के स्फूर्तीवान हैं। गांव के 34 बच्चे पास के गांव घाटोली में पहाड़ की चढाई के बाद नियमित रूप से अध्ययन के लिए जाते हैं। कक्षा एक में पढने वाले बच्चे भी बिना रूके पहाड़ी का पार करते हैं। हमारे साथ कक्षा 1 में पढने वाली 4 वर्षीय लड़की कोमल व सीमा एवं 5 वर्षीय लड़का सोहनसिंह भी पूरी जीवटता के साथ पहाड़ी को पार कर गये।
पहलीबार पहुंचे संभागीय आयुक्त-
संभाग के प्रशासनिक मुखिया कोटा के संभागीय आयुक्त श्री केसी वर्मा 7 अगस्त को दामोदरपुरा पहुंचे तथा ग्रामीणों की जीवन चर्या एवं समस्याओं से रूबरू हुए। उन्होंने ग्रामीणों के अभाव अभियोग सुनकर मौके पर ही सम्बन्धित अधिकारियों को निस्तारण करने के निर्देश दिये। गांव में मनरेगा का कार्य शुरू करवाने, प्रत्येक 15 दिवस में चिकित्सा सुविधाये, परिवार पहचान कार्ड की त्रुटियां दूर करने एवं मतदाता सूची में नाम जुडवाने जैसे निर्णय मौके पर किये गये। ग्रामीणों को उन्होंने राष्ट्रीय टाइगर अभ्यारण्य के कारण मूलभूत सुविधाओं के विकास में आ रही परेशानी को देखते हुए स्वप्रेरित होकर सरकार द्वारा विस्थापन के लिए दिये जा रहे पैकेज का लाभ लेकर आने वाली पीढियों के भविष्य के लिए विस्थापित होने का आग्रह भी किया। पहाड़ की चढाई पार कर वे समीप के गांव घाटोली भी गये तथा विद्यालय में विद्यार्थियों का शैक्ष्णिक स्तर भी परखा। इसी पहाड़ी को पार कर ग्रामीण अपनी दिनचर्या का सामान बाजार से ला पाते हैं। नियमित रूप से दूध को बाजार ले जाना हो या अपने सगे संबधियों के जाना हो यह पहाड़ उनके लिए साधारण रास्ते के समान लगता है। गांव की समस्याओं को दैनिक भास्कर के श्री प्रवीण जैन एवं जी राजस्थान के श्री हिमांशु मित्तल लोगों के सामने लाये, उनके लिए आभार।
दामोदरपुरा जैसे गांवो को वनों एवं वन्य जीवों के रखवाले कहें या नहीं वन विभाग इस असमंजस में हैं लेकिन यहां के निवासी आज भी अपनी परम्पराओं में इस प्रकार रचबस गये हैं कि ना टाइगर का भय ना ही किसी और जंगली जानवर का भय। आधुनिक सुविधाओं से दूर होते हुए भी अभी तक पूरी तरह विस्थापन को तैयार नहीं हैं।

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