वन्देमातरम हमारा मज़हबी गान नही है,यह राष्ट्रभक्ति का गान है।
देश का बहुसंख्यक वर्ग छद्म-धर्मनिरपेक्षता की केंचुली से बाहर निकल रहा है,इसका श्रेय उन लोगों को है जो हर मुद्दे पर मज़हबी नज़रिए से नुक्ताचीनी करते हैं। ऐसा करने वाला व्यक्ति कभी "धर्मनिरपेक्ष" नही हो सकता है जो राजनीतिक,सामाजिक सभी मुद्दों पर मज़हबी नजरिये से प्रतिक्रिया व्यक्त करता है।जो व्यक्ति वन्देमातरम सिर्फ इसलिए नही गाना चाहता है कि उसका मज़हब ऐसा करने की इजाज़त नही देता है,वह सेकुलर होने का सिर्फ ड्रामा मात्र कर सकता है!
हम वन्देमातरम इसलिए नही कहते हैं कि यह हमारे धर्म का कोई मूलमंत्र है,वरन इसलिए गाते है कि यह मातृभूमि के प्रति हमारा प्यार एवं लगाव प्रदर्शित करने की अदभुद अभिव्यक्ति है।
अक्सर वह लोग सेकुलर होने का ज्यादा ढोंग करते हौ जिन्हें इसकी अवधारणा का कोई ज्ञान नही है।
#सुनील सत्यम
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