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गुरुवार, 23 फ़रवरी 2017

कौम के प्रति त्याग और समर्पण हो तो देवराज गुर्जर जैसा

कौम के प्रति त्याग और समर्पण हो तो देवराज गुर्जर जैसा
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दुनिया की अद्वितीय शादी
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धरना स्थल पर ही रचाई शादी, वधु बोली-मांग नहीं मानी तो वह धरने पर बैठ जाएगी
2017-02-23
सिकंदरा. दौसा जिले के सिकंदरा कस्बे में गुरुवार को गुर्जर शहीद स्मारक पर आठ दिन से धरने व अनशन पर बैठे एसबीसी चयनित अभ्यर्थियों में से  देवराज गुर्जर ने शुक्रवार को धरना स्थल पर ही शादी रचाई। उसने धरना स्थल पर वधु ममता को अपनी जीवन संगिनी बनाने के हिन्दू परम्परा से सात फेरे लिए।

इस दौरान बड़ी संख्या में गुर्जर समाज के लोग मौजूद थे। वर-वधु के परिवार के लोग धरना स्थल पर मौजूद रहे। धरना स्थल पर महिलाओं ने मंगलाचार गीत गाए। शादी के दौरान लोगों ने सरकार विरोधी नारे भी लगाए तथा चयनित अभ्यर्थियों को शीघ्र नियुक्त की मांग की। गुर्जर स्मारक भगवान देवनारायण के जयकारों से गूंज उठा।

उल्लेखनीय है कि विभिन्न परीक्षाओं  में चयनित एसबीसी अभ्यर्थियों द्वारा 12 फरवरी से धरना शुरू किया था। इसके दो दिन बाद आधा दर्जन अभ्यर्थी आमरण अनशन पर बैठ गए। इसी बीच आधा दर्जन अनशनकारियों की तबीयत बिगडऩे से अस्पताल में भर्ती कराया गया। सरकार द्वारा अभ्यर्थियों की नियुक्ति के मामले में सकारात्मक जवाब नहीं मिलने से प्रतिदिन अनशनकारियों की संख्या बढ़ती गई।  गुरुवार सुबह से देवराज की धरना स्थल पर शादी को लेकर गुर्जर समाज के लोगों ने बैठक में चर्चा की।


वधु बोली मांग नहीं मानी तो वह धरने पर बैठ जाएगी
सात फेरे के बाद वधु ममता ने संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने मांग नहीं मानी तो वे भी अपने पति के साथ अनशन में शामिल होगी। शादी के बाद वधु पीहर गुढाआशिकपुरा के लिए रवाना हो गई, जबकि देवराज धरना स्थल पर अनशन पर बैठ गया।

सुबह ही किया निर्णय
शाम को चार बजे आनन-फानन में धरना स्थल पर शादी का मण्डप सजाया गया। बड़ी संख्या में लोग धरना स्थल पहुंचने लगे। आसपास के गांवों की गुर्जर महिलाएं भी शादी में शामिल हुई। समाज के लोगों ने दूल्हे की शादी की रस्में शुरू की। महिलाओं ने दूल्हे को उपटन लगाकर नहलाया। दूल्हे ने नए कपड़े नहीं पहन कर पहले से पहने हुए पुराने कपड़े में शादी की इच्छा जताई। महिलाओं ने दूल्हे को जुआरी में रुपए देने की रस्म की।

महिलाओं ने मंंगलाचार गीत गाए। कन्या पक्ष के पहुंचने पर दुल्हन को मण्डप में बिठाया गया। धरना स्थल पर ही कन्या पक्ष के लोगों ने दूल्हे की अगवानी की। मण्डप से पहले बनाए गए तोरण द्वार पर दूल्हे का स्वागत किया। तथा तोरण मारने के बाद वर-वधु ने एक दूसरे को वरमाला डाली।

इसके बाद मण्डप में अग्नि की साक्षी में पाणीग्रहण संस्कार की रस्में शुरू हुई। वधु के माता-पिता ने दूल्हा व दुल्हन के पीले हाथ की रस्म की। इसके साथ वर व वधु ने अग्नि के साथ फेरे लिए। इस दौरान मौजूद लोगों को शर्बत पिलाया गया।

तब तक जारी रखेंगे धरना
सात फेरे के बाद दूल्हा व दुल्हन ने समाज के लोगों को संबोधित करते हुए कहा सरकार चार हजार अभ्यर्थियों को जब तक नियुक्ति नहीं देगी तब तक अनशन जारी रहेगा। दुल्हन ममता सिंह बैंसला ने भी जल्द नियुक्ति नहीं मिलने पर अनशन पर बैठने की घोषणा की। इसके बाद दुल्हन के साथ कन्या पक्ष गुढाआशिकपुरा के लिए रवाना हो गए तथा देवराज धरना स्थल पर ही अनशन पर बैठा रहा।

ये भी रहे साक्षी
शादी के दौरान गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष भूरा भगत, गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के प्रवक्ता हिम्मत सिंह पाड़ली, श्रीराम बैंसला, राजस्थान गुर्जर महासभा के प्रदेशाध्यक्ष मनफूल तुंगड़, जिलाध्यक्ष रामचन्द्र खूंटला, पूर्व सरपंच मलखान सिंह बासड़ा, लक्ष्मणसिंह छावड़ी खानपुर, देव सेना जिलाध्यक्ष जलसिंह कसाना, भारतीय किसान गुर्जर महासभा के प्रदेशाध्यक्ष गिरिराज घुरैया, विक्रम मण्डावर, रामप्रसाद पटेलवाला, धाराङ्क्षसह बासड़ा, मुकेश बासड़ा, विश्वम्बर बासड़ा, एडवोकेट राजाराम, अभ्यर्थी खेमङ्क्षसह छावड़ी, जोगिंदर भाटी सहित हज़ारों लोग मौजूद थे।


दूसरे भाई ने गांव में ही फेरे
झूपड़ीन निवासी पूर्व सरपंच रामजीलाल चाड के बेटे देवराज व देवऋषि की गुढाआशिकपुरा निवासी विश्राम बैंसला की बेटी ममता व माया के साथ शादी हुई है।

धरना स्थल पर देवराज की शादी हुई तथा छोटा भाई देवऋषि बारात लेकर गुढाआशिकपुरा पहुंचा है। धरना स्थल पर देवराज की शादी के बाद दुल्हन ममता के साथ कन्या पक्ष ने गुढाआशिकपुरा पहुंचा। वहां पर देवऋषि व माया के शादी की रस्में हुई।

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