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गुरुवार, 5 जुलाई 2018

गुर्जर समाज ने किया तोगड़िया का स्वागत

गुर्जर समाज ने किया तोगड़िया का स्वागत

दिल्ली 05जुलाई2018

प्रखर राष्ट्रवादी नेता डॉ प्रवीण भाई तोगड़िया के अंतरराष्ट्रीय हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर आज दिल्ली में गुर्जर समाज द्वारा स्वागत किया गया। गुर्जर समाज के प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय वीर गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय महासचिव सत्यवीर गुर्जर, मेरठ के पूर्व ब्लॉक प्रमुख बृजवीर सिंह गुर्जर, राष्ट्रीय वीर गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय सचिव अनिल मावी ने मुलाकात की। अंतरराष्ट्रीय हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ प्रवीण भाई तोगड़िया से राष्ट्रीय एकता, अखंडता, सामाजिक, धार्मिक एवं किसानों के मुद्दों पर गुर्जर नेताओं की विस्तृत चर्चा की हुई। अगर डॉ प्रवीण भाई तोगड़िया की जाति की चर्चा की जाए तो वो गुर्जर समुदाय से ही है और उन्होंने वार्ता में बताया कि उनका गौत्र तोंगड (तोगड़िया) है। इस अवसर पर तोगड़िया ने गुर्जर नेताओं के साथ ही भोजन किया।

युवा नेता गोपाल गुर्जर का जन्मोत्सव मनाया

युवा नेता गोपाल गुर्जर का जन्मोत्सव मनाया

मांडलगढ़ 04जुलाई2018

युवा कांग्रेस के मांडलगढ़ विधानसभा अध्यक्ष, देव सेना के ब्लॉक अध्यक्ष, अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के जिला मंत्री गोपाल गुर्जर का 33वां जन्मोत्सव युवाओं ने मांडलगढ़ में मनाया। इस अवसर पर मांडलगढ़ के राजकीय हॉस्पिटल में लोगो को फल वितरण किया गया। इस अवसर पर युवा कांग्रेस के मांडलगढ़ विधानसभा अध्यक्ष गोपाल गुर्जर, पंचायत समिति सदस्य एवं उप प्रधान प्रत्याशी रतन गुर्जर, पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष सीताराम गुर्जर, सामाजिक कार्यकर्ता नन्दलाल गुर्जर, छात्र नेता कमलेश गुर्जर, अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के जिला सोशल मीडिया प्रभारी मुकेश गुर्जर, हरिलाल गुर्जर, शंकरलाल गुर्जर, ताराचंद गुर्जर आदि थे।

मंगलवार, 3 जुलाई 2018

हिन्दुत्व को समर्पित डॉ प्रवीण तोगड़िया अध्यक्ष अंतरराष्ट्रीय हिन्दू परिषद

डॉ प्रवीण तोगड़िया वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष है, वे पेशे से एक विख्यात कैंसर सर्जन है। उन्हें १९७९ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंस्वेकों का मुख्य मार्गदर्शक केवल २२ वर्ष की उम्र में चुना गया। उन्हें उनके उत्तेजक और गर्म बयानों के लिए जाना जाता है। हिंदुत्व की व्याख्या का ये उदहारण समेत सटीक विवरण देते है। ये सौराष्ट्र के पटेल गुर्जर है, किसान के बेटे है। बचपन में एक बार उन्हें सोमनाथ मंदिर में जाने का अवसर प्राप्त हुआ (सोमनाथ के पुनरुद्धार से पहले), जब उन्होंने सोमनाथ के ध्वस्त अवशेष देखे तो उनके जीवन की दिशा ही बदल गयी और वे हिन्दुतत्व के पुनरुद्दार में लग गए। ये युवा अवस्था में ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ गए थे। रामेश्वर पालीवाल, एक आरएसएस प्रचारक संघ के मार्गदर्शन मे युवा तोगड़िया ने स्वयं सेवक के रूप में अपना जीवन शुरू किया। समस्त विश्व के हिन्दुत्व के कार्यकर्मो में व्यस्त रहने के बावजूद भी ये महीने में एक सप्ताह रोगियों की जाँच के लिए देते है। तोगडिया के मुताबिक हिन्दू मजबूत और सैन्य स्थिति में होने के बावजूद सभी धर्मो को सामान दृष्टि से देखता है।

रविवार, 1 जुलाई 2018

काला आम के सीने में समाई है गुर्जरों की शौर्यगाथा

काला आम के सीने में समाई है गुर्जरों की शौर्यगाथा

बुलंदशहर: मेरा नाम आप लोग 'काला आम' के नाम से जानते हैं, लेकिन अधिकांश लोगों को शायद मालूम न हो, मेरा असली व पुराना नाम 'कत्ले आम' है। 'कत्ले आम' लोगों की जुबान पर नहीं चढ़ा और धीरे-धीरे यह अपभ्रंश होकर 'काला आम चौराहा' कहा जाने लगा। यहां पहले आम का विशाल बगीचा था। इसी आम के पेड़ों पर आजादी के मतवालों को लटका कर अंग्रेज फांसी दी जाती थी। कभी-कभी अंग्रेजी फौज, गुर्जर क्रांतिकारियों को उल्टा लटकाकर नीचे आग जला देते थे। मैंने वीर गुर्जर पुत्रों को तड़प-तड़प कर शहीद होते देखा है। अब कोई आम का पेड़ तो शेष नहीं है, पर गुर्जर शहीदों की याद आज भी ताजा है। उन लम्हों को याद कर मेरे आंखों में समंदर उमड़ आते हैं। दिल फटने लगता है। हिचकियां थमती नहीं। आओ मैं उन रणबांकुरों की कहानी सुनाऊं, जिनकी बदौलत आज तुम खुली हवा में सांस ले रहे हो।

कुछ दिन बाद आपलोग स्वतंत्रता दिवस मनाओगे। लाल किले पर झंडा फहरेगा। आप लोग बड़े शान से तिरंगा लेकर निकलोगे। उत्सव मनाओगे। जश्न में डूबोगे, लेकिन शायद ही तुम्हें उस गहराई से अहसास हो कि इस आजादी के लिए भारत माता के लालों ने कितनी यातनाएं व जुल्में सहीं। जालिमों ने जान भी ली तो तड़पा-तड़पा कर। मैं इसका गवाह हूं। मैंने अपनी आंखों से यह सब होते देखा है। उफ, मैं उन पलों को याद नहीं करना चाहता। भारत माता के लालों को पहले तो बर्बरता से कठोर यातना दी जाती थी। उसके बाद उन्हें फांसी पर लटकाया जाता था। साथ ही कोरे भी बरसाए जाते थे। क्रांतिकारी उस वक्त भी 'भारत माता की जय','वंदे मातरम' के नारे लगाते थे। कई दिनों तक पेड़ से उनकी लाश लटकी रहती। अंग्रेज इस तरह से सामूहिक फांसी देकर लोगों को आतंकित भी करते थे ताकि देशभक्ति की डगर पर चलने से पहले लोग सौ बार सोचें। आते-जाते राहगीर केवल उसे देख सकते थे, उनका अंतिम संस्कार करने की भी हिम्मत नहीं होती थी। उस मंजर को याद कर मेरा भी खून खौल उठता है। हां, एक मोहन बाबा नाम के संत थे जो रात में चुपके से शहीदों की लाश ले जाते थे और उसका गुपचुप तरीके से अंतिम संस्कार करते थे। यह काली नदी तट पर कुटी बनाकर एकांत में रहते थे। उन्हीें के नाम पर इस इलाके का नाम मोहनकुटी पड़ा।

आओ, तुम्हें बताऊं कि अंग्रेज बुलंदशहर के गुर्जर क्रांतिकारियों से इतने घबराते क्यों थे, उनके प्रति इतनी नफरत क्यों थी? क्यों ये सरेआम सामूहिक फांसी देते थे? दरअसल, पहले स्वतंत्रता संघर्ष से लेकर आजादी मिलने तक बुलंदशहर ने आजादी की लड़ाई में पूरे दम-खम से भाग लिया। 10 मई 1857 को देश की आजादी की प्रथम जंग शुरू हुआ। सर्वप्रथम क्रांति का संदेश लेकर अलीगढ़ से बुलंदशहर पंडित नारायण शर्मा 10 मई को आए थे और उन्होंने गुप्त रूप से नवीं पलटन को क्रांति की प्रेरणा दी थी। बुलंदशहर जिले में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल वीर गूजरों ने फूंका। दादरी और सिकंदराबाद के क्षेत्रों के गुर्जरों ने विदेशी शासन का प्रतीक डाक बंगलों, तारघरों और सरकारी इमारतों को ध्वस्त करना प्रारंभ किया। सरकारी संस्थाओं को लूटा गया और इन्हें आग लगा दी गई। एक बार नवीं पैदल सेना के सैनिकों ने सैकडों क्रांतिकारी गूजरों को पकड़ कर जेल में बंद कर दिया था। इससे क्रांति की आग और भड़क उठी। अंग्रेज विचलित हो उठे। क्रांति का दमन करने के लिए उन्होंने दमन करने के लिए बरेली से मदद मांगी लेकिन नकारात्मक उत्तर मिला। रामपुर नवाब भी घुड़सवार नहीं भेज सके। सिरमूर बटालियन की दो फौजी टुकड़यिां, जिनकी आने की पूर्ण आशा थी, वे भी न आ सकीं। जनरल डीवट को मेरठ का सरकारी खजाना भेजने के लिए कुछ यूरोपियन सैनिक भेजने का जो आग्रह किया था, वह भी पूर्ण नहीं न हो सका। इस बुलंदशहर के अंग्रेज अधिकारियों के लिए चारों तरफ निराशा छाई हुई थी। इसी बीच क्रांतिकारियों ने 21 मई 1857 को अलीगढ़ से बुलंदशहर तक इलाके को अंग्रेजी शासन से मुक्त करा दिया। हालांकि 25 मई को अंग्रेजों ने फिर से कब्जा कर लिया। बुलंदशहर नगर से करीब 8 किलोमीटर दूर मालागढ़ के नवाब वलीदाद खां उस समय भी अपनी अलग प्रभुसत्ता बनाए हुए थे और अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के काफी करीबी और वफादार थे। क्रांति का साथ देने वह वह दिल्ली से चलकर 14वां रिसाला झांसी की 12वीं पलटन और छह तोपों को लेकर बुलंदशहर आ गए। 31 मई 1857 को उन्होंने बुलंदशहर पर अधिकार कर लिया और दिल्ली में सैनिकों ने बहादुर शाह जफर को सम्राट घोषित कर दिया। 31 मई से 28 सितंबर तक बुलंदशहर अंग्रेजी दासता से मुक्त रहा। इस बीच स्थिति तेजी से बदलने लगी। आसपास के कई जमींदार अंग्रेजों से जा मिले। लड़ाई में नवाब की सेना का काफी नुकसान हो गया था। नवाब ने बहादुर शाह जफर से घुड़सवार, तोप, गोला-बारूद मांगे, पर बादशाह के पास इतनी शक्ति कहां थी। अंग्रेज इस बीच मेरठ छावनी को मजबूत करने में जुट गए। 24 सितंबर को ले. कर्नल ग्रीथेड के नेतृत्व में विशाल सेना गाजियाबाद के रास्ते बुलंदशहर को कूच की। 28 सितंबर को इस बुलंदशहर में आजादी के चाहने वाली सेना और अंग्रेजी सेना में घमासान युद्ध् हुआ। अंग्रेज विजयी हुए और बुलंदशहर पर फिर से अधिकार कर लिया। इसके बाद बुलंदशहर अंग्रेजों के आंख पर चढ़ गया और चुन-चुन कर क्रांतिकारियों का कत्ल किया जाने लगा। वर्ष 1857 से 1947 के दौरान काला आम कत्लगाह बना रहा। इस दौरान हजारों क्रांतिकारी को यहां फांसी दी गई। अब काला आम की सूरत बदल गई है। आजादी के बाद लोगों ने सरेआम कत्ल के गवाह रहे इन पेड़ों को कटवा दिया। ये पेड़ लोगों को अखरते थे। जब पेड़ कट गए तो मौजूदा जगदीश सिनेमा हॉल के बराबर में नाले के निकट शहीदों की याद में रोटरी क्लब द्वारा स्मारक बना दिया गया। बाद में चौराहे के बीचोंबीच यहां प्रशासन द्वारा शहीद पार्क बनाया गया। अब काला आम चौराहा बुलंदशहर का हृदय कहा जाता है।

1824 से जारी है गुर्जर आंदोलन

1824 का विशाल गुर्जर आंदोलन -

तलवार और भालों से किया था गुर्जरों ने बंदूकों का सामना – 1824 का विशाल गुर्जर आंदोलन
गुर्जर आंदोलन – भारत जब गुलाम था तब देश के अलग-लग जगहों पर देश को स्वतंत्र कराने के लिए आन्दोलनों का दौर चल रहा था.
दश के इतिहास में बड़े-बड़े आन्दोलन हुए लेकिन आज इतिहास की किताबों में वहीँआन्दोलन दर्ज हैं जिनके अंदर बड़े नेता या देश का खास एक परिवार शामिल था.
बहुत ही कम इतिहास की किताबें ऐसी हैं जहाँ 1857 से पहले के आन्दोलनों का जिक्र किया गया है.

जब हम आन्दोलनों को पढ़ना शुरू करते हैं तो हम राष्ट्रीय स्तर के आंदोलन तो पढ़ लेते हैं किन्तु क्षेत्रीय स्तर के आंदोलनों को पढ़ना भूल जाते हैं और यही हमारी सबसे बड़ी गलती होती है. असल में अंग्रेजों की हुकूमत को राष्ट्रिय आन्दोलनों ने नहीं बल्कि क्षेत्रीय आन्दोलनों ने खोखला किया था.सन 1824 में देश के एक हिस्से में गुर्जर आंदोलन हुआ था और इस आंदोलन ने कुछ वैसा ही प्रभाव कायम किया था जैसा कि 1857 की क्रांति से उत्पन्न हुआ था. इन दोनों आन्दोलनों में बसफर्क इतना था एक आन्दोलन देश व्यापी हो गया था और एक आंदोलन निश्चित क्षेत्र तक फ़ैल कर थम गया था.

गुर्जर आंदोलन –

गुर्जर आंदोलन का सच्चा इतिहास

सबसे पहले यह जानना बेहद जरुरी है कि अंग्रेजों के खिलाफ 1757 से ही अलग-अलग जगहों पर विद्रोह चल रहे थे. भारतीय समाज ने शुरुआत से ही अंग्रेजों का विरोध किया था. सन 1824 मेंसहारनपुर, हरिद्वार और मेरठ में अंग्रेजों एक खिलाफ जबरदस्त विद्रोह चल रहे थे. अंग्रेजों ने इन आन्दोलनों को रोकने के लिए यहाँ छावनी तक बना रखी थी. सहारनपुर और हरिद्वार क्षेत्र में कुछ कस्बे ऐसे थे जहाँ गुर्जर वंश का साम्राज्य कायम था. हरिद्वार के पास आज जो रूडकी शहर है वहां पहले लंढौरा नाम का एक कस्बा काफी मशहूर था और यहाँ तब 804 गाँव थे. तब उस समय यहाँ लंढौरा, नागर, भाटी, जाटो की कुचेसर आदि जातियां राज कर रही थीं. अंग्रेज भली-भांति जानते थे कि यह जातियां कभी भी हमारे लिए खतरा बन सकती हैं. यही कारण था कि अंग्रेज इन लोगों कोकिसी भी हालत में खत्म कर देना चाहते थे.

यह बात कुछ उस समय की है जब अंग्रेजों को बर्मा के हाथों हार मिली थी और यहाँ के गुर्जरों को ऐसा लगने लगा था कि अब शायद इस बड़ी हार के कारण अंग्रेज डरे हुए हैं और यही समय है जब अंग्रेजों से देश को आजाद कराया जा सकता है. ऐसा बताया गया है कि तब गुर्जरों में एक बड़े ताकतवर नेता होते थे जिनका नाम राजा विजय सिंह था उन्होंने इस गुर्जर आंदोलन की कमान अपने हाथों में ली थी और देश को आजाद कराने के लिए तलवार और भालों से ही बंदूकों का सामना करने यह निकल गये थे.

मात्र 5 महीनों में हिला दी थी अंग्रेजों की जड़ें

आप अगर गुर्जर इतिहास को पढ़ते हैं तो आपको सन 1824 का विशाल गुर्जर आंदोलन पढ़ने को जरुर मिल जायेगा. इतिहास की पुस्तक कोतवाल धनसिंह गुर्जर को जब आप पढेंगे तो आपको यहाँ लिखा नजर आएगा कि गुर्जरों ने सर्वप्रथम 1824 में कुंजा बहादुरपुर के ताल्लुकदार विजय सिंह और कल्याण सिंह उर्फ कलवा गुर्जर के नेतृत्व में सहारनपुर में जोरदार विद्रोह किये. पश्चिमी उत्तर प्रदेशके गुर्जरों ने इस विद्रोह में प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया परन्तु यह प्रयास सफल नहीं हो सका था.

वैसे  ऐसा भी बताया जाता है कि यह विद्रोह कुछ 5 महीने चला था लेकिन इस समय में कई बार अंग्रेजों के खजाने को लूट लिया गया था. 3 अक्तूबर 1824 का दिन इन शहीद स्वतंत्रता सेनानियों केलिए एक बुरा दिन था. जो आन्दोलन अब सहारनपुर और देहरादून तक फैलता जा रहा था वह अचानक से किसी खबरी के कारण रुक जाता है. अंग्रेजों ने इस दिन भारी सेना के साथ राजा विजय सिंहजिस किले में छुपे हुए थे वहां वहां हमला किया था. इन गुर्जरों ने शहीद होने से पहले तलवारों और भालों से ही अंग्रेजों का सामना किया था किन्तु एक समय बाद यह लोग संघर्ष करने में असफल होगये थे.

सन 1824 का यह गुर्जर आन्दोलन बेशक उस समय असफल हो गया था किन्तु यह आग जो इन वीर गुर्जरों ने लगे थी यह आग आगे चलकर 1857 की क्रान्ति में तब्दील भी हुई थी. आज भारतवर्षको इन वीरों की कहानियों को नई पीढ़ी के सामने लाने की आवश्यकता है ताकि इन कहानियों को पढ़कर यह साफ़ हो जाए कि भारत को आजादी मात्र कुछ लोगों के संघर्ष से नहीं मिली है और ना हीयह आजादी किसी परिवार की बपौती है.

(अधिक जानकारी के लिए आपको इतिहास की पुस्तक कोतवाल धनसिंह गुर्जर को जरुर पढ़ लेना चाहिए. यह पुस्तक आपको सहारनपुर या गुर्जर वंश के इतिहास पुस्तकालय में में आसानी से मिल जाएगी.)

Source - youngistan.in

गुर्जर रेजीमेंट को लेकर जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे गुर्जर नेता चौधरी नेपाल सिंह कसाना

गुर्जर रेजिमेंट राष्ट्रभक्त गुर्जरों का हक

संपूर्ण भारत के हिंदू मुस्लिम गुर्जर समाज की ओर से भारतीय सेना में गुर्जर रेजिमेंट के गठन की मांग करते हुए भारत सरकार को मैंने एक पत्र 16 जून को प्रेषित किया था। इस पत्र का जवाब माननीय गृहमंत्री जी की ओर से आया था कि आप उचित कार्रवाई हेतु रक्षा सचिव से मुलाकात करें। जिसके विषय में बताते हुए मैंने आप सभी को सोशल मीडिया के माध्यम से सूचना दी थी। और गुर्जर समाज के सभी लोगो के सुझाव मांगे थे। हजारों लोगों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए। उन सभी सुझावों का अध्ययन करने के बाद मैं ये कहना चाहता हूं कि इस समय भारतीय जनता पार्टी देश की शीर्ष सत्ता पर काबिज है। तो सरकार के सामने गुर्जर रेजिमेंट गठन की मांग को बीजेपी के गुर्जर सांसद, मंत्री एमएलए एवं राष्ट्रीय व प्रादेशिक पदाधिकारी ज्यादा मजबूती से रख सकते हैं।राजनैतिक विरोधाभास की स्थिति पैदा होने की संभावना को ध्यान में रखते हुए विपक्षी पार्टियों के वरिष्ठ गुर्जर नेताओं को इस मुलाकात से दूर रखने का निर्णय लिया गया है।
इसके लिए आप सभी लोग बीजेपी के एमपी,मिनिस्टर्स, एमएलए और राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक पदाधिकारियों से फोन कॉल, वॉट्सएप, फेसबुक, ईमेल और पत्र के माध्यम से मांग करें कि आप लोग भी मेरी तरह पत्र लिखकर और मेल भेज कर भारत सरकार के सम्मुख गुर्जर रेजिमेंट की मांग को मजबूती के साथ उठाएं।
बीजेपी के उपरोक्त में से जिन नेताओं के फोन नंबर, वॉट्सएप, ईमेल या पत्र व्यवहार का पता आपके पास हैं वो मुझे भी देने का कष्ट करें। जिससे मैं भी उनको इस संबंध में अपने स्तर से सूचित कर सकूं। चूंकि आज तकनीकी युग है और समय अभाव के कारण सोशल मीडिया फोन कॉल आदि ही सूचना आदान प्रदान का सबसे सरल माध्यम है। लेकिन यदि इन सभी में से कोई यह कहे कि मैं व्यक्तिगत रुप से उनसे मिलकर सूचना दूं तो मैं ऐसा करने को भी तैयार हूं। गुर्जर समाज के सभी सम्मानित नेताओ के सामूहिक नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल के रूप में रक्षा सचिव भारत सरकार से मुलाकात को जाएंगे।मेरा बीजेपी से समस्त नेताओ से विनम्र निवेदन है कि अपने अपने स्तर से एक पत्र अथवा ईमेल एफबी ट्विटर के माध्यम से ये मांग उठाए। तथा साथ ही माननीय प्रधानमंत्री ,माननीय गृह मंत्री, रक्षा मंत्री एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष भाजपा से व्यक्तिगत रूप से मिलने का कष्ट करें। तथा 15 दिन बाद रक्षा सचिव से समय लेकर सभी लोग सामूहिक रूप से चलेंगे। रक्षा सचिव से 15 दिन बाद मिलने का समय बीजेपी के सभी नेतागण अपने अपने स्तर से लेने का कष्ट करें।मै तो अपने स्तर पर प्रयास करूंगा ही।
मै भारतीय जनता पार्टी के उन गुर्जर सांसद, मंत्री, विधायक और राष्ट्रीय व प्रादेशिक पदाधिकारियों की लिस्ट आपसे साझा कर रहा हूं जिनसे आप गुर्जर रेजिमेंट की मांग भारत सरकार के सम्मुख उठाने की मांग करें-
बीजेपी सांसद -
1-चौधरी कृष्णपाल सिंह गुर्जर (केंद्रीय मंत्री )
2- चौधरी रमेश बिधूड़ी गुर्जर (सांसद दिल्ली)
3-चौधरी कंवर सिंह तंवर (सांसद उत्तर प्रदेश)
4-चौधरी सुखबीर सिंह जौनापुरिया (सांसद राजस्थान) 5-श्रीमती रक्षा खडसे (सांसद महाराष्ट्र)

दिल्ली विधानसभा-
1-चौधरी जगदीश प्रधान पीलवान गुर्जर

हरियाणा विधानसभा-
1-चौधरी कंवर पाल गुर्जर (विधानसभा स्पीकर)
2-चौधरी तेजपाल तवर गुर्जर

उत्तर प्रदेश विधानसभा-
1-चौधरी अवतार सिंह भड़ाना ( एमएलए एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य बीजेपी)
2- चौधरी अशोक कटारिया( महामंत्री बीजेपी यूपी एवं एमएलसी)
3-चौधरी तेजपाल नागर
4-चौधरी प्रदीप गुर्जर
5-चौधरी सोमेंद्र तोमर
6-चौधरी नंदकिशोर गुर्जर

राजस्थान विधानसभा-
1-चौधरी रामलाल गुर्जर
2- चौधरी राजेंद्र गुर्जर
3-चौधरी मानसिंह गुर्जर
4-चौधरी प्रल्हाद गुंजल
5-चौधरी कालू लाल गुर्जर( कैबिनेट मंत्री)
6-चौधरी अनीता गुर्जर
7-चौधरी हेमसिंह भड़ाना गुर्जर ( कैबिनेट मंत्री)
8-चौधरी अलका सिंह गुर्जर

मध्यप्रदेश विधानसभा-
1-चौधरी रुस्तम सिंह गुर्जर (मंत्री कैबिनेट)

उत्तराखंड विधानसभा-
1-चौधरी कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन

महाराष्ट्र विधानसभा-
1- चौधरी गिरीश दत्तात्रेय महाजन गुर्जर( मंत्री)
2- चौधरी कैलाश गौरव पाटिल गुर्जर
3-चौधरी गुलाबराव रघुनाथ पाटिल गुर्जर
4- चौधरी एकनाथ खडसे ( पूर्व मंत्री)

जम्मू कश्मीर विधानसभा-
1-चौधरी अब्दुल गनी कोहली गुर्जर

हिमाचल प्रदेश विधानसभा-
1-चौधरी परमजीत सिंह पम्मी गुर्जर

गुर्जर समाज के अन्य सामाजिक नेता -
1-चौधरी मसूद चौधरी गुर्जर (जम्मू कश्मीर) पूर्व एडिशनल डीजीपी।
2- चौधरी रामशरण भाटी ( राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल भारतीय गुर्जर महासभा)
3 -चौधरी दीपक भाई पाटिल ( कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल भारतीय गुर्जर महासभा)
4- डॉक्टर यशवीर सिंह ( कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल भारतीय गुर्जर महासभा)
5 - डॉक्टर जिले सिंह( राष्ट्रीय महामंत्री अखिल भारतीय गुर्जर महासभा)
6- चौधरी बच्चू सिंह गुर्जर( राष्ट्रीय महामंत्री अखिल भारतीय गुर्जर महासभा)
7- चौधरी राजपाल सिंह कसाना(राष्ट्रीय महामंत्री अखिल भारतीय गुर्जर महासभा)
8- डॉक्टर कलम सिंह ( शिक्षा विद एवं प्रसिद्ध समाजसेवी मुजफर नगर यूपी)
9- प्रधानाचार्य श्री रामपाल सिंह (शिक्षा विद एवं प्रसिद्ध समाजसेवी मुजफर नगर यूपी)
10 - श्री ओमप्रकाश गांधी( शिक्षा ऋषि एवं संस्थापक गुर्जर कन्या विद्या मंदिर- इंटरमीडिएट एवं डिग्री कालेज देवधर)
11 - चौधरी मामचंद छोकर( प्रसिद्ध समाजसेवी पंचकुला हरियाणा)
12- सरदार गुरमेल सिंह( अध्यक्ष गुर्जर भवन पंचकुला)
13- जान निशार गुर्जर(एडवोकेट सहारनपुर)
14 - इंजी मोहमद शम्मी खटाना गुर्जर( अध्यक्ष अखिल भारतीय गुर्जर विकास परिषद)
15 - चौधरी पुरुषोत्तम फागना ( अध्यक्ष अखिल भारतीय गुर्जर महासभा राजस्थान)
16- इंजी आरपी सिंह भाटी(गुर्जर सभा, भोपाल गुर्जर भवन)
17 - चौधरी राजेंद्र सिंह घुरिया ( रिटायर्ड डीएसपी ,महामंत्री गुर्जर सभा भोपाल गुर्जर भवन)
18- चौधरी ज्ञान चंद कसाना( गुर्जर सभा प्रबंधन कमेटी कुरुक्षेत्र धर्मशाला)
19 - योगेंद्र सिंह गुर्जर( प्रबंधन कमेटी गुर्जर सभा ग्रेटर नोएडा)
20- चौधरी भंवर सिंह गुर्जर( अध्यक्ष गुर्जर सभा मेरठ)
21 - ठाकुर अरिदमन सिंह गुर्जर( वरिष्ट बीजेपी नेता जिला जालौन यूपी)
22 -चौधरी यतीन्द्र कटारिया( वरिष्ठ सामाजिक गुर्जर नेता अमरोहा यूपी)
23 -कर्नल सी पी सिंह( ग्रेटर नोएडा मूल निवासी बरेली)
24- मेजर जनरल चौधरी श्रीपाल नागर (दिल्ली)
25- चौधरी कर्मवीर गुर्जर गुमी( अध्यक्ष अखिल भारतीय गुर्जर विकास मंच एवं वरिष्ठ समाजसेवी मेरठ)
26- राम शरण सिंह( रिटायर्ड आईएएस मुजफरनगर)
27- राम रतन सिंह कटारिया( वरिष्ठ भाजपा नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता कुरुक्षेत्र हरियाणा)
28- श्यामवीर भाटी (प्रबंधक मिहिर भोज पोस्ट ग्रेजुएशन कॉलेज दादरी जीबी नगर)
29- चौधरी विद्या राम प्रधान( अध्यक्ष विद्या प्रचारिणी सभा दादरी)
30- चौधरी देवराज पंवार( अध्यक्ष अखिल भारतीय गुर्जर विद्या प्रचारिणी सभा रामपुर मनिहारान सहारनपुर)
31-मनोज चौधरी( पूर्व एमएलए बीजेपी सहारनपुर)
32- चौधरी वीरेंद्र सिंह गुर्जर( बीजेपी नेता मिरगपुर सहारनपुर)
33- श्रीमती मृगांका सिंह( पूर्व प्रत्याशी बीजेपी कैराना)
34- चौधरी अशोक कसाना( वरिष्ठ समाजसेवी फतेहाबाद आगरा)
35- चौधरी चंद्रपाल सिंह ( अध्यक्ष गुर्जर सभा आगरा)
36- चौधरी नागेन्द्र प्रताप गुर्जर (वरिष्ठ समाजसेवी ग्राम मतवार मिर्ज़ापुर यूपी)
37-शेषमनी भूर्तिया गुर्जर (एडवोकेट इलाहाबाद  हाईकोर्ट )
38-चौधरी सूरत सिंह( विख्यात एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट न्यू दिल्ली)
39-श्री देवराज चौधरी( वरिष्ठ समाजसेवी नालागढ़ हिमाचल प्रदेश)
40- श्री तेजपाल सिंह पंवार( पूर्व एमएलए रुरकी हरिद्वार)
41- चौधरी ओमकार सिंह चौहान( अध्यक्ष गुर्जर मिलन समिति रुड़की)
42- प्रशांत चौधरी( पूर्व एमएलए वरिष्ठ नेता बीजेपी)
43- श्री विजय भाटी ( जिलाध्यक्ष बीजेपी गौतमबुद्धनगर)
44- डॉक्टर निर्भय गुर्जर (वरिष्ठ समाजसेवी बरेली)
45-चौधरी राजपाल सिंह जुड्डा ( जिला चेयरमैन सहकारी बैंक सहारनपुर)
46- गुरदेश चौधरी( जिलाध्यक्ष बीजेपी युवा मोर्चा सहारनपुर)
47- रॉबिन सिंह गुर्जर( जिलाध्यक्ष युवा मोर्चा बीजेपी मेरठ)
48- चौधरी राजकुमार पंवार( जिलाध्यक्ष अपना दल सहारनपुर)
49- चौधरी प्रताप सिंह गुर्जर( वरिष्ठ भाजपा नेता मेरठ)
50-चौधरी देवेन्द्र गुर्जर( ब्लॉक प्रमुख बागपत)
51- एडवोकेट गुरदयाल सिंह गुर्जर ( रिटायर्ड सूबेदार मेजर रिवाडी हरियाणा)
52- चौधरी राजेंद्र सिंह एडवोकेट( वरिष्ठ समाजसेवी पलवल हरियाणा)
53-चौधरी यशपाल पंवार( पूर्व जिलाध्यक्ष बीजेपी मुजफर नगर)
54- चौधरी अनूप सिंह पिलवान( वरिष्ठ समाजसेवी करावल नगर दिल्ली)
55-चौधरी बलबीर सिंह आर्य(वरिष्ठ समाजसेवी)
तिलप्ता गौतबुद्धनगर
56-चौधरी मनवीर नागर(वरिष्ठ समाजसेवी)
ग्रेटर नोएडा
57-चौधरी तेज सिंह भाटी( सेवानिवृत चीफ इंजी)
प्रताप विहार गाजियाबाद
58-चौधरी यशवीर नागर ( चेयरमैन ब्लूम पब्लिक स्कूल ग्रुप)
गाजियाबाद
59-चौधरी चंद्रशेखर कसाना( प्रिंसिपल)
सकलपुरा लोनी गाजियाबाद
60-चौधरी ओमवीर सिंह( वरिष्ठ अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट दिल्ली)
गाज़ियाबाद
61-चौधरी सुनील सिंह( एडवोकेट दिल्ली हाई कोर्ट)
न्यू दिल्ली
61-श्री मूल चंद चौधरी( चेयरमैन सिटी पब्लिक स्कूल ग्रुप)
नोएडा
62-चौधरी जगदीश नंबरदार
बादलपुर गौतम बुद्ध नगर
63-चौधरी मौजी राम नागर
दुजाना
64-चौधरी टीकाराम प्रधान( नेता अपना दल)
मुरहाट बिजनौर
65-चौधरी नीरज पंवार( जिलाध्यक्ष किसान यूनियन)
घसोती सहारनपुर
66-कुंवर देवेन्द्र सिंह ( वरिष्ठ समाजसेवी)
हसापुर मवाना मेरठ
67-चौधरी जगदीश सिंह गुर्जर (संपादक गुर्जर निर्देशक)
शिवपुरी मध्य प्रदेश
68-चौधरी जयपाल सिंह ( पूर्व मंत्री)
मेरठ
69-चौधरी धनपाल सिंह( प्रो सीसीएसयू मेरठ)
मेरठ
70-चौधरी जतन सिंह( वरिष्ठ समाजसेवी)
घरबरा ग्रेटर नोएडा
71-चौधरी सतवीर सिंह गुर्जर( राष्ट्रीय महामंत्री राष्ट्रीय वीर गुर्जर महासभा)
मेरठ
72-चौधरी सुरेन्द्र सिंह जैलदार
क्योड़क कैथल हरियाणा
73-मास्टर महकार सिंह(वरिष्ठ समाजसेवी)
ढासरी, मुजफर नगर
74- श्री डीपी नागर(वरिष्ठ समाजसेवी)
वसुंधरा गाजियाबाद
75-चौधरी सुरेन्द्र सिंह अवाना(वरिष्ठ समाजसेवी)
निठारी यूपी
76-चौधरी अमित भाटी( अध्यक्ष क्राइम फ़्री इंडिया फोर्स)
नोएडा
77-चौधरी भगत सिंह कसाना(वरिष्ठ समाजसेवी)
हाजीपुर नोएडा
78-चौधरी जगपाल सिंह गुर्जर(वरिष्ठ समाजसेवी)
अदावली मुरादाबाद
79-चौधरी अशोक गुर्जर(वरिष्ठ समाजसेवी)
मुरादाबाद
80-ठाकुर भगवान सिंह गुर्जर (वरिष्ठ समाजसेवी)
पहाड़पुरा झांसी यूपी
81- चौधरी श्याम सिंह गुर्जर
देवबंद राजस्थान
82-चौधरी गुरदयाल सिंह एडवोकेट(वरिष्ठ समाजसेवी)
रेवाड़ी हरियाणा
83-चौधरी योगेन्द्र मावी(वरिष्ठ समाजसेवी)
मुरैना मध्य प्रदेश
84-चौधरी धर्मेद्र कसाना उर्फ डिंपी कसाना
ग्वालियर मध्य प्रदेश
85-चौधरी जितेंद्र सिंह गुर्जर
जालौन
86-श्री दिलीप सिंह पाटिल
वडोदरा गुजरात
87-चौधरी कटार सिंह वर्मा
गुर्जर भवन पंचकूला

बीजेपी के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी एवं नेता -
1- चौधरी नवाब सिंह नागर (प्रदेश उपाध्यक्ष यूपी बीजेपी)
2- चौधरी हरीश चंद्र भाटी( वरिष्ठ भाजपा नेता यूपी)
3- चौधरी मुखिया गुर्जर एवं चौधरी कुलविंदर सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष मेरठ यूपी)
4- चौधरी पवन मावी एवं पत्नी( जिला पंचायत अध्यक्ष गाजियाबाद यूपी)
5-चौधरी सुभाष भाटी( वरिष्ठ भाजपा नेता)
दादरी ग्रे नोएडा
6-चौधरी नरेश एडवोकेट(वरिष्ठ भाजपा नेता)
मेरठ
7- चौधरी जितेंद्र वर्मा( क्षेत्रिय संयोजक बीजेपी)
मेरठ
8- ठाकुर अरिदमन सिंह(पूर्व झांसी मंडल प्रभारी)
झांसी
9-चौधरी नाथू सिंह गुर्जर( पूर्व सांसद)
दौसा राजस्थान
10-चौधरी रामबीर सिंह बिधूड़ी( पूर्व एमएलए एवं वरिष्ठ बीजेपी नेता)
दिल्ली
11-चौधरी तेजपाल सिंह( पूर्व एमएलए बीजेपी)
रुड़की उत्तराखंड
12-श्री रूप चौधरी(पूर्व एमएलए बीजेपी)
वसुंधरा गाजियाबाद
13-श्री देवराज चौधरी(बीजेपी नेता)
नालागढ़, हिमाचल प्रदेश
14-चौधरी रघुराज उर्फ बॉबी गुर्जर( बीजेपी नेता)
सहारनपुर
15-चौधरी वीरेंद्र सिंह गुर्जर( वरिष्ठ बीजेपी नेता)
मिरगपुर सहारनपुर
16-चौधरी यशपाल सिंह गुर्जर ( पूर्व जिलाध्यक्ष बीजेपी)
मुजफरनगर यूपी
17- राजपाल सिंह ( बीजेपी नेता)
उलेढा बिजनौर
18-चौधरी नरेश गुर्जर(बीजेपी नेता)
उलेढा बिजनौर
19-चौधरी सुरत सिंह वर्मा( पूर्व मंत्री एवं बीजेपी नेता)
मुज़फफरनगर
20-चौधरी सुरेश नागर ( वरिष्ठ बीजेपी नेता)
दुजाना गौतबुद्धनगर
21-चौधरी महेश अवाना(वरिष्ठ बीजेपी नेता)
नोएडा
22-चौधरी बबली कसाना(पूर्व जिला पंचायत सदस्य)
गाजियाबाद
23 -चौधरी अशोक नागर (वरिष्ठ बीजेपी नेता)
गाजियाबाद
24-चौधरी रकम सिंह( पूर्व जिला अध्यक्ष बीजेपी)
डाढा ग्रेटर नोएडा
25- श्री रवीन्द्र भड़ाना( पूर्व एमएलए बीजेपी मेरठ)
मेरठ यूपी

नोट - अन्य वरिष्ठ सामाजिक नेता एवं बीजेपी के पदाधिकरियों को भी सामूहिक प्रतिनिधिमंडल में शामिल करना भी प्रस्तावित है।
पूरे देश के सभी सामाजिक गुर्जर संगठनों के अध्यक्ष एवं अन्य पदाधिकारी भी आमन्त्रित है।
आप सभी से निवेदन है कि बीजेपी के अन्य वरिष्ठ नेता और अन्य वरिष्ठ समाजसेवी जो छूट गए उनके नाम बताने का कष्ट करें।
सधन्यवाद।।

निवेदक -आपका अपना

चौधरी नेपाल सिंह कसाना
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष- अखिल भारतीय गुर्जर महासभा
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष- अपना दल (एस)
प्रभारी- पश्चिमी यूपी/राजस्थान
मो -9871228633
Mail- npsapnadal@gmail.com
पता - कसाना हाउस, c-33 सेक्टर-40, नोएडा।